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यमुना माता मार्ग के नाम पर रखा जाए नेशनल हाईवे 73 व 73ए का नाम

Mon, 20 Mar 2017 11:45 PM IST
yamuna nagar beauro
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j - फोटो : amar uajala, yamuna nagar
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उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा का प्रतिनिधि मंडल सोमवार को मंडल प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र मित्तल की अध्यक्षता में डीसी से मिला। उन्होंने डीसी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। जिसमें उन्होंने जिले बन रहे नेशनल हाईवे 73 व 73ए का नाम यमुना माता मार्ग रखने की मांग की। महेंद्र मित्तल ने बताया की जिला यमुनानगर धार्मिक नगरी है और यमुना यहीं ये निकलती है। श्री आदिबद्री धाम, सरस्वती कुंड, यमुना नदी, पंचतीर्थी तीर्थ, कपाल मोचन तीर्थ आदि तीर्थ यमुनानगर नगर में है। सरकार द्वारा विकास कार्य के तहत यमुनानगर में जो नेशनल हाईवे बन रहा है। उस रोड का नाम माता यमुना मार्ग रखा जाए।
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ये रोड यमुनानगर के चारो तरफ घूम कर बनाया जा रहा है और यमुनानगर का अस्तितव मां यमुना से ही है। इसलिए उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा व यमुना बचाओ समिति, हिन्दू राष्ट्र मंडल, रेल यात्री सेवा मंडल व जिले के अन्य संगठन व जिला वासी अपेक्षा करते हैं कि इस मार्ग का नाम माता यमुना मार्ग रखा जाए। मित्तल ने बताया की निजी स्कूल संचालकों की मनमानी व तानाशाही रवैये के विरोध में भी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा गया। प्रदेश में निजी स्कूलों के द्वारा समाज, अभिभावकों, छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है। अनाप शनाप खर्चे लिये जा रहे हैं। जबकी सरकार द्वारा आदेश जारी कर किसी भी तरह के अनाप शनाप खर्चों पर रोक लगाई थी। मित्तल ने बताया की निजी स्कूल वाले अभिभावकों से कोई नाजायज फीस, दाखिला फीस या अन्य खर्चे नहीं ले सकते। किंतू निजी स्कूल प्रबंधक व संचालक सरकारी आदेशों का अवहेलना कर रहे हैं।

स्कूलों द्वारा अपनी इच्छानुसार मोटी फीस व एडमिशन व एनुअल चार्ज लिए जा रहे है। अपनी दुकानें खोल कर किताबें, कापियां व वर्दीयां मनमर्जी के रेट पर दी जा रही हैं। शिक्षा विभाग के सख्त निर्देश की 1, 6, 9, 11 कक्षा में ही एडमिशन फीस सरकारी मानको के अनुसार लेनी होती है लेकिन सरकारी आदेशों के उपरांत भी निजी स्कूल वाले अपनी ही मनमर्जी चला रहे हैं। जिसका ब्योरा न तो सरकार को उपलब्ध करवाया जा रहा ना ही अभिभावकों को पूर्ण जानकारी दी जा रही है जो की भ्रष्टाचार का संकेत है। 134ए के तहत आने वाले छात्रों को भर्मित कर अभिभावको व छात्रो का शोषण किया जा रहा है। सरकार द्वारा उन विद्यालयों को चिन्हित कर उन विद्यालयों व भवनों का अधिग्रहण किया जाये। हर स्कूल के बाहर पेंट से लिखा हुआ सूचना पट हो जिसपर लिये जाने वाले खर्चो का पूर्ण ब्योरा हो। विद्यालयों द्वारा ली जाने खर्चो व फीस एव चार्ज का पूर्ण ब्यौरा पेंट से लिखा हुये सुचना पट हो। जिससे अभिभावकों का शोषण होने से बचेगा। मौके पर प्रदेश महासचिव संजय मित्तल, तारा चंद सैनी, रक्षा मित्तल, सुदेश, ज्योति, सुनीता, राजकृष्ण, विरेंद्र गुप्ता, डा. राठौर, रवि अंठाले, संजय पालपाल, संजीव मित्तल,  अमरेंद्र, विरेंद्र शर्मा, दीपक बढोला, गौरव, अखिलेश, अश्वनी शर्मा, जसविंदर आदि मौजूद रहे।
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