तापमान में इजाफा होते ही मंडियों में गेहूं की आवक ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। लेकिन आवक के हिसाब से गेहूं का उठान नहीं हो पा रहा है। किसानों की गाढ़ी कमाई का सोना खुले आसमान के नीचे पड़ा है। आने वाले दिनों में मंडियों में गेहूं की आवक काफी अधिक होने की उम्मीद है। ऐसे में यदि उठान ने तेजी ने पकड़ी तो मंडियों में किसानों को गेहूं रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
विभागीय जानकारी के अनुसार जिले के मंडियों में 14 अप्रैल तक कुल 60 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है। इसमें से करीब 60 प्रतिशत गेहूं की उठान हो चुकी है। फिलहाल मंडियों में गेहूं की आवक धीमी है। यदि मौसम का मिजाज यही रहा तो अगले एक सप्ताह में मंडियों में गेहूं का अंबार लग जाएगा। गौरतलब है अमूमन हर साल अप्रैल माह में बारिश होती है, जिससे मंडियों में खुले मेें रखा गेहूं भीगकर खराब हो जाता है। जिले में टॉप थ्री मंडियों में शामिल सरस्वती नगर मंडी में आज तक शेड नहीं बन पाया है। यहां सारा गेहूं खुले आसमान के नीचे रखा जाता है। इसके अलावा रणजीतपुर, खारवन व रसूलपुर मंडी में भी शेड की व्यवस्था नहीं है।
जगह नहीं मिली तो सूखने के लिए सड़क पर डाला गेहूं...
मंडियों में गेहूं की उठान की रफ्तार तो धीमी है ही, मंडियों में गेहूं लेकर आने वाले किसानों को और दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। जगाधरी की अनाजमंडी में गेहूं की आवक काफी अधिक हो रही है। यहां शैडों के नीचे व फड़ में गेहूं रखने की जगह नहीं बची। किसान अपनी गेहूं सड़कों पर डाल रहे हैं। रतनपुरा से आए किसान राजबीर ने बताया की वह शुक्रवार को गेहूं लेकर आए थे पर उनमें नमी होने के कारण खरीद नही की गई। हर तरफ मंडी गेहूं से भरी पड़ी है। गेहूं सुखाने के लिए जगह नहीं मिल रही, मजबूरन सड़कों पर गेहूं सुखाना पड़ रहा है। कलानौर के किसान हरबंस ने बताया की गेहूं का उठान सही तरह से नहीं हो रहा। किसानों के लिए मंडी में न तो खाने की कोई कैंटीन है और न ही पीने के लिए पानी। अगर रात में रुकना पड़ता है तो कोई रेस्ट हाऊस भी नहीं है। किसानों को खुले असमान के नीचे ही सोना पड़ता है। जिन किसानों के जेब में पैसे होते हैं, उन्हें डर बना रहता है। प्रशासन की ओर से बनाए गए शौचालयों में सफाई भी नहीं है।
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-अब तक नहीं शुरू हुई 24 घंटे बिजली की व्यवस्था-
खिजराबाद। मंडियों में गेहूं की आवक शुरू हो चुकी है लेकिन खिजराबाद मंडी में अभी भी अव्यवस्था का माहौल है। मंडी में चल रहे विकास कार्य की वजह से मिट्टी, बजरी, पत्थर, टूटी हुई इंटें आदि सड़कों पर ही बिखरे पड़े हैं। अभी तो सीजन शुरू हुआ है गेहूं की आवक कम है लेकिन आने वाले कुछ ही दिनों में यही अव्यवस्था किसानों के लिए मुसीबत बन सकती है। मंडी में अबकी बार बिजली विभाग की ओर से 24 घंटे बिजली की व्यवस्था का भी प्रबंध नही किया गया है, जिसकी वजह से आढ़तियों में रोष है। खिजराबाद के सरपंच और आढ़ती प्रवीन अग्रवाल ने बताया हर साल सरकार की ओर से फसल के सीजन के समय में 24 घंटे बिजली की सुचारू व्यवस्था करवा दी जाती थी, लेकिन अब की बार फसली सीजन शुरू हुए कई दिन बीत गए लेकिन खिजराबाद अनाज मंडी में बिजली की सुचारू व्यवस्था नही करवाई गई है। आढ़तियों का कहना है कि आढ़ती अपने खर्चे पर जनरेटर आदि मंगवाकर गेहूं की साफ सफाई करवा रहे हैं। इससे आढ़तियों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। उन्होने बताया कि गलियों और नालियों की साफ-सफाई ना होने से भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे जो किसान अपना अनाज लेकर मंडी में आता है, उसके लिए और अनाज को तोलने आदि में आढती को भी परेशानी होती है। शौचालयों में भी कई जगह ताले लटके हुए हैं जिसकी वजह से किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।