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हिमाचल के डिप्टी रेंजर और जिले के वन दरोगा भी लपेटे में

Sun, 19 Mar 2017 11:33 PM IST
yamuna nagar beauro
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c - फोटो : amar uajala, yamuna nagar
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खैर तस्करी में मिलीभगत के लिए हिमाचल के डिप्टी रेंजर तरसेम सिंह व जिले के वन दरोगा मान सिंह भी लपेटे में आ गए हैं। एसआईटी की जांच में सामने आया वन दरोगा ने चोरी की खैर को अनुमति की लकड़ी दिखाने के लिए 20 दिन बाद उस पर फर्जी मार्किंग की वहीं, डिप्टी रेंजर द्वारा उसकी सिरमौर के बहराल चेक पोस्ट पर फर्जी एंट्री कर दी। जबकि एंट्री के समय की सीसी कैमरों में फुटेज जांचने पर चेक पोस्ट से कोई गाड़ी आती नहीं दिखी। दोनों अधिकारियों की कारगुजारी से आरोपी कोर्ट से लकड़ी को सुपर दारी पर छुड़वा ले गए। एसआईटी ने जांच में पुख्ता सबूत मिलने पर दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। जिन्हें रविवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को एक दिन के ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया है।
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बता दें कि 16 मार्च को एसआईटी द्वारा खैर तस्करी के एक अन्य मामले में मिलीभगत के लिए जिले के डिप्टी रेंज अधिकारी सर्वजीत समेत फर्जी बिल मुहैया कराने वाले यूपी के गांव तुलसीपुर के चरण स्वरूप को भी गिरफ्तार किया गया था। यानि एसआईटी द्वारा खैर तस्करी में मिलीभगत के लिए अब तक वन विभाग के तीन बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसआईटी के इंचार्ज एवं सीआईए-2 के सब इंस्पेक्टर नरेश कुमार की मानें तो खैर तस्करी के 21 मामले हैं, जिनकी जांच जारी है। इनमें कई राज्यों के अधिकारियों व कर्मचारियों समेत कई फार्मों की संलिप्तता हो सकती है।

ऐसे आए पकड़ में
26 फरवरी 2016 को वन विभाग द्वारा कलेसर से अलसुबह चार बजे 90 क्विंटल खैर की लकड़ी से भरा ट्रक पकड़ा। इस दौरान ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। आरोपियों ने पौंटा साहिब के सतपाल, जिसका लकड़ कारोबार है, से 25 फरवरी का फर्जी बिल बनवा लिया। बाद में हिमाचल प्रदेश के बहराल चैकपोस्ट पर तैनात वन विभाग के पौंटा साहिब निवासी डिप्टी रेंजर तरसेम ने बैक डेट में दो बजे पकड़े गए ट्रक की एंट्री दिखा दी। जबकि एसआईटी ने सीसी कैमरों की फुटेज की जांच कर पाया कि 26 फरवरी को 12 से 3 बजे के बीच चेकपोस्ट से कोई ट्रक निकला ही नहीं। मामले में यमुनानगर के कलेसर क्षेत्र में चाहड़ों निवासी वन दरोगा मान सिंह ने करीब 20 दिन बाद पकड़ी गई खैर पर फर्म के नाम की फर्जी मार्किंग कर दी, ताकि वह अनुमति की लकड़ी लगे। दोनों अधिकारियों की कारगुजारी से आरोपियों ने कोर्ट से सुपरदारी पर लकड़ी छुड़वा ली। दोनों अधिकारियों को फर्जी मार्किंग व एंट्री के आधार पर एसआईटी ने गिरफ्तार कर रविवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें एक दिन के ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया है।
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दरोगा के साथ मार्किंग करने का आरोपी अब भी फरार
 उक्त मामले में 27 मार्च थाना खिजराबाद पुलिस ने धोखाधड़ी व खैर तस्करी का केस दर्ज किया था। इसमें आरोपियों को बैक डेट का बिल बनाने के आरोप में पौंटा साहिब के लकड़ कारोबारी सतपाल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि वन दरोगा के साथ चोरी की लकड़ी पर फर्म के नाम की मार्किंग करने वाला कलेसर निवासी अली हसन फरार चल रहा है। एसआईटी के इंचार्ज एवं सीआईए-2 के कार्यवाहक इंचार्ज नरेश कुमार ने कहा कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है, जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

साथ लगते प्रदेशों के साथ नेपाल से भी जुड़े हैं तार
 एसआईटी इंचार्ज नरेश कुमार ने बताया कि हरियाणा समेत साथ लगते हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश  के साथ नेपाल से भी खैर तस्करी के तार जुड़े हैं। टीम ने नेपाल में भी 800 कं्िवटल खैर तस्करी के मामले में कार्रवाई की है। जांच में सामने आया है कि तस्कर स्कूटर-बाइक के नंबर को बड़े वाहनों पर प्रयोग करते थे। चोरी की गई लक्कड़ पर टैक्स भी अदा करते थे। बिल तो होता था, लेकिन इसमें माल नहीं। उनकी टीम में एएसआई राजेश कुमार, राय सिंह, रमेश राणा, हेड कांस्टेबल रोहण, राजू, कुलदीप व चरणजीत सिंह शामिल रहे।
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