सत्ता में आने से पहले अच्छे दिन आने वाले हैं, वादा करने वाली भाजपा के सत्ता में आने के बावजूद गांव दयालगढ़ के लोगों को आज भी अच्छे दिनों की बांट जोह रहे हैं। जबकि गांव को यमुनानगर विधायक घनश्यामदास अरोड़ा ने गोद लिया हुआ है। इसके बाद भी गांव में कोई सुधार नहीं नजर आया, जबकि यहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है वहीं, स्ट्रीट लाइट व पानी की निकासी जैसी सुविधा का भी कोई प्रबंध नहीं हैं। ग्रामीणों की मानें तो गांव को गोद लेने पर यहां आए विधायक ने उन्हें लोगों की समस्या सुनने हर माह आने की बात कही थी, किंतु इसके बाद न वह यहां आए और न ही विकास हो पाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सभी विधायकों से एक गांव गोद लेने का आह्वान करने पर यमुनानगर विधायक घनश्यामदास अरोड़ा ने जगाधरी गांव दयालगढ़ को गोद लिया था। इससे गांव के लोगों में उम्मीद जगी थी कि गांव की छोटी-बड़ी समस्याएं दूर होंगी व सड़क, लाइट, पानी की निकासी व सफाई व्यवस्था दुरुस्त होगी। जबकि आलम यह है कि गांव को गोद लिए एक वर्ष बीतने पर भी गांव के हालात ज्यों के त्यों हैं। गांव में करीब एक हजार घर है और करीब 2500 वोट हैं। ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के वक्त जनप्रतिनिधि उन्हें कई तरह के वादे करते हैं, किंतु बाद में उन्हें भूल जाते हैं। विधायक द्वारा गांव को गोद लेने पर गाव में कुछ सुधार की आस हुई थी, लेकिन वह आज तक पूरी नहीं हुई।
स्वच्छता अभियान से अछूता नजर आता हैं दायलगढ़ गांव
मौजूदा हालात देखकर गांव स्वच्छता अभियान से अछूता नजर आता है। चूंकि गांव में सड़कों किनारे व खाली प्लॉटों में कबाड़ के ढेर लगे हैं वहीं, कूड़ेदान में पत्थर भरे हैं। इसी गंदगी के आलम में ग्रामीणों को बदबू के साथ मक्खी-मच्छरों की दिक्कतों से दो-चार होना पड़ रहा है और उनमें बीमारी फैलने का भय बना हुआ है।
न गलियां दुरुस्त और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट भी नहीं
गांव की अधिकतर गलियां टूटी हुई हैं। उनमें बने गड्ढे व बिगड़े लेवल के कारण राहगीरों व वाहन चालकों को आनेजाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार इसके चलते राहगीर व वाहन चालक चोटिल भी हो जाते हैं। ज्यादा दिक्कत रात के वक्त आती है, चूंकि गांव में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं है।
आज तक पेयजल समस्या का नहीं हुआ समाधान
गांव के इस्लाम ने कहा कि विधायक ने गांव गोद लिया था तो कहा था कि हर माह यहां आकर लोगों की समस्या को सुन उनका हल निकलने में मदद करेंगे। लेकिन फरवरी में मंदिर में एक कार्यक्रम में विधायक आए थे, उसके बाद वह आज तक नहीं आए। जब से गांव बसा है, तब से पीने के पानी की समस्या है, जो आजतक हल नहीं हुई। अब गर्मी में पानी के बिना लोग कैसे रहे, पानी की पाइप लाइन कई दिन से लीक है, उसे भी कोई ठीक करने नहीं आया।
सड़कों पर बहता है पानी
युशफ ने बताया कि गांव में सफाई का बुरा हाल है। पानी की निकासी न होने से पानी सड़कों पर बहता है और खाली जगह में जमा रहता है। इसके लिए सरपंच से कई बार कह चुके हैं, पर कोई हल नहीं निकाला गया। गंदगी इतनी है कि बदबू के मारे गली में खड़े भी नहीं हो पाते हैं। जो नालियां बनी हैं, उन्हें आपस में जोड़ा ही नहीं गया, जिससे उनका पानी सड़कों पर बह रहा है। अगर शिकयत करते हैं तो फंड न होने की बात कही जाती है। सीएम विंडो पर शिकायत करने पर भी कोई हल नहीं निकला।
अपने घरों के आसपास लगाई लाइट, बाकि गलियों में अंधेरा
अरशिद का कहना है कि हर पंचायत मेंबर को पांच-पांच स्ट्रीट लाइट मिली थी, जो गली में जरूरत के मुताबिक लगाई जानी थी। लेकिन सभी ने अपने घरों के आसपास ही इन स्ट्रीट लाइट्स को लगा दिया। जबकि कई गलियों में आज भी अंधेरा है, जिससे ग्रामीणों को आनेजाने में परेशानी होती है और भय का माहौल रहता है। गांव को जब किसी द्वारा गोद नहीं लिया गया था, तब भी गांव में ऐसे ही थे और आज भी ज्यों के त्यों हैं तो सरकार की इस योजना का भला क्या लाभ हुआ।
पंचायत के पास कमाई का अपना कोई भी साधन नहीं है, जिससे कि गांव का विकास कराया जा सके। विधायक जब पिछली बार आए थे तो गांव के विकास के लिए एक करोड़ रुपये मंजूर कर गए थे, जो अभी तक नहीं मिले हैं। गांव में पानी की निकासी की सबसे बड़ी दिक्कत थी, उसका कुछ समाधान हो गया है। जैसे ही पैसा आएगा तो अधूरी पड़ी नालियां का काम भी पूरा करा दिया जाएगा। पानी के लिए नलकूप में बड़ी मोर डलवा दी है, उसे समस्या का हल हो गया है और जहां पानी लीक कर रहा है, उसकी शिकायत कर दी है, जो जल्द ठीक हो जाएगी।
रसिया रानी, सरपंच, दयालगढ़ गांव।
गाव में समस्याएं हैं। इसके लिए विधानसभा सत्र में भी आवाज उठाई थी। इसके बाद एक करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का इस्टीमेट बनाकर पंचायत की ओर से भेजा हुआ है, जैसे ही वह मंजूर होकर आता है तो सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी
घनशयामदास अरोड़ा, विधायक, यमुनानगर।