कपालमोचन मुख्य मार्ग स्थित कॉलोनी में 113 वर्षीय कमला देवी का निधन हो गया। वह अपने पीछे चार बेटों, तीन बेटियों सहित दो पोते, सात पड़पोते और घोतियों सहित लगभग तीन दर्जन से अधिक सदस्यों का परिवार छोड़ गई। बेटे काली चरण ने बताया कि उनकी माता का जन्म वर्ष 1903 में हुआ था। पेहवा की रहने वाली थी और घाड़ क्षेत्र के गांव शेरगढ़ में बाबूराम के घर ब्याही गई थी। लगभग पचास साल पहले वह बिलासपुर के शिव चौक के समीप स्थित कॉलोनी में रहने आ गए। कमला देवी ने प्रदेश में जब पेंशन योजना शुरू की थी तो बिलासपुर में सबसे पहले पेंशन धारक वहीं थी। वह शुरू से धार्मिक प्रवृति की रही और रोजाना अजात आश्रम में लगभग दो किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर जाती थी। उनकी माता अभी भी रोजाना घर का सारा काम करती थी। सुई में धागा डालकर सिलाई और कढ़ाई का कार्य भी कर लेती थी। उसने लोकसभा, विधानसभा, पंचायत चुनावों में वोट डाली थी। उनकी मृत्यु पर कस्बे की सामाजिक संस्थाओं और संगठनों ने शोक प्रकट किया।