बुधवार को लघु सचिवालय में हुई नगर निगम हाउस की बैठक में पार्षदों में जमकर गाली-गलौज हुई। मामला हाथापाई तक पहुंच गया, लेकिन दूसरे पार्षदों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत करवाया। वहीं ट्विन सिटी की बदहाल सफाई व्यवस्था पर भी पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। बैठक में निगम का बजट भी पास किया गया।
नगर निगम के सीनियर वाइस प्रेजीडेंट पवन बिट्ट द्वारा अपने वार्ड में एक पार्क का नाम वार्ड के एक दिवंगत पार्षद पर रखे जाने पर वार्ड नंबर 13 के पार्षद नवनीत कुमार ने इसका विरोध किया। नवनीत ने कहा हाउस की दूसरी बैठक में उनके वार्ड में भी एक चौक का नाम एक दिवंगत पार्षद के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा था। इस पर सीनियर डिप्टी मेयर ने यह कहकर विरोध किया था वह कोई क्रांतिकारी नहीं है। उनके विरोध के कारण यह प्रस्ताव पास नहीं किया गया। अब सीनियर डिप्टी मेयर खुद इस प्रस्ताव को पास करवाना चाह रहे है तो क्या वह पार्षद कोई क्रांतिकारी है। इसे लेकर सीनियर डिप्टी मेयर पवन बिट्टू व पार्षद नवनीत शर्मा की पहले तो जमकर तू-तू-मैं-मैं हुई। इसके बाद गाली-गलौज शुरू हो गयी। बैठक में मौजूद अन्य पार्षदों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करवाया। इस दौरान सीनियर डिप्टी मेयर की पार्षद देवेंद्र, व कर्मवीर के साथ भी गाली गलौच हुई।
पार्षदों ने सफाई के ठेकों पर उठाए सवाल
बैठक के दौरान ट्विन सिटी की बदहाल सफाई व्यवस्था का मुद्दा छाया रहा। अधिकतर पार्षदों ने उनके वार्ड में सफाई व्यवस्था के प्रति असंतोष जताया। पार्षदों ने कहा अब तो हालात पहले से अधिक खराब हो गए हैं। महिला पार्षद निर्मल चौहान ने अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा वार्डों को जोन में बांटकर सफाई का ठेका दे दिया गया। लेकिन इसमें पार्षदों की राय नहीं ली। कुछ वार्डों में तो सफाई का सारा काम ठेकेदारों को दे दिया गया, जबकि कुछ वार्डो में केवल सरकारी कर्मचारी भी सफाई के लिए रखे गए हैं।
मानसून नजदीक, नहीं हुई नालों की सफाई
पार्षदो ने अब तक ट्विन सिटी के नालों की सफाई न होने पर रोष जताया। कहा पिछले साल मानसून सीजन में हुई बरसात के कारण भारी जलभराव हुआ था। घरों के अंदर पानी आ जाने से शहरवासियों का करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। इस बार मानसून नजदीक है, लेकिन अभी तक नाले गंदगी व कूड़े से अटे पड़े हैं। वहीं, नालों पर हो रहे अवैध निर्माण की ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जमीनों पर अवैध कब्जे को लेकर अधिकारी सुस्त
बैठक में नगर निगम की जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों पर भी पार्षदों ने रोष जताया। पार्षद देवेंद्र सिंह ने कहा अवैध कब्जों की जानकारी जब भी निगम को कोई पार्षद देता है तो अधिकारी उस पर ध्यान नहीं देते। जब जमीन पर कब्जा हो जाता है तो उसे नोटिस देे दिया जाता है पर कोई कार्रवाई नहीं होती। पार्षदों ने मांग किया निगम की जमीनों की निशानदेही करवाकर उसकी बाऊंड्री करवाई जाए ताकि उन पर अवैध कब्जे न हो सके। वार्ड नंबर 14 की पार्षद निर्मल चौहान ने बताया कि पिछली बरसात में जब शहर मेें भारी जलभराव हो गया था। उस समय तमाम अधिकारियों ने बाईपास चौक के नजदीक नाले पर हो रहे अतिक्रमण को इसके लिए जिम्मेवार ठहराया था, लेकिन वह अतिक्रमण आज भी जस का तस है। क्या अधिकारी एक बार फिर शहर के डूबने का इंतजार कर रहे है।
स्पीड ब्रेकरों के मुद्दे पर बैठक में नोकझोंक
बैठक के शुरू होते ही विभिन्न विकास कार्यों के साथ-साथ मासिक बैठक न होने को लेकर पार्षदों में गुस्सा दिखाई दिया। बिना टेंडर व पार्षद की सहमति के बिना गली मोहल्लों में मन मर्जी से लगाए गए स्पीड-ब्रेकरों के मुद्दे पर भी बैठक में नोंक झोंक हुई। कुछ पार्षदों का कहना था कि बिना पार्षदों की अनुमति व जानकारी के उनके वार्ड में स्पीड ब्रेकर लगाए गए। जबकि कुछ ऐसे वार्ड हैं, जिनमें कोई भी स्पीड ब्रेकर नही लगाया गया। इस पर निगम के एक्सईएन ने सफाई देते हुए कहा कि बिना टेंडर के लगाए गए स्पीड ब्रेकरों की ठेकेदार को अदायगी नही की जाएगी और इस मामले की जांच भी की जाएगी। इसके लिए एक महीने का समय निर्धारित किया गया।
अधिकारी ने दी झूठी जानकारी तो भड़की पार्षद
वार्ड नंबर सात में अधूरे पड़े भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र के मामले पर चर्चा हुई तो निगम के कार्यकारी अधिकारी ने इस सामुदायिक केंद्र को पूरा करने की बात कही। इस पर वार्ड की पार्षद कुसुम त्यागी ने कार्यकारी अधिकारी की बात काटते हुए बताया कि अधूरा निर्माण पिछले चार साल से जस का तस पड़ा है और वहां कोई भी कार्य नहंी हुआ है। उन्होंने अधिकारी को नसीहत दी कि झूठ बोलकर हाउस को गुमराह करने का प्रयास न किया जाए।