20 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी करने के फरमान और पिछले तीन महीने से वेतन न मिलने पर भड़के एनएचएम कर्मचारी मंगलवार को दो दिन की सांकेतिक हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों की हड़ताल से सिविल अस्पताल और ग्रामीण क्षेत्र में कुछ सेवाएं प्रभावित हुई। स्थाई कर्मचारियों द्वारा मोर्चा संभालने से हड़ताल का असर ज्यादा नहीं दिखा। एनएचएम कर्मचारियों ने हर्बल पार्क में धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जल्द मांगे न माने जाने पर कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की धमकी दी है।
एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) के तहत स्वास्थ्य विभाग में क्लर्क, एंबुलेंस ड्राइवर, नर्सें, फार्मासिस्ट, कंप्यूटर असिस्टेंट, डाटा एंट्री ऑपरेटर, फोर्थ क्लास समेत करीब सवा पांच सौ कर्मचारी लगे हुए हैं। मंगलवार को इनमें से सात डॉक्टर, 86 नर्स, 146 एएनएम, छह इनफोर्मेशन असिस्टेंट, छह ब्लॉक आशा कॉर्डिनेटर, छह लैब टेक्रिशीयन, छह फार्मासिस्ट, डाटा एंट्री ऑपरेटर और फोर्थ श्रेणी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। 91 एबुलेंस चालक हड़ताल में शामिल नहीं हुए। मंगलवार सुबह इन कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से सिविल अस्पताल यमुनानगर में कोई खास प्रभाव देखने को नहीं मिला। एनएचएम कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद स्थाई रूप से तैनात कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। जिनका सहयोग ठेके पर रखे गए कर्मचारियों ने किया। हालांकि ओपीडी, डिलीवरी रूम, दवाई वितरण की कुछ सेवाएं थोड़ी प्रभावित हुई। हड़ताल पर जाने से स्थाई कर्मचारियों ने काम का दबाव अधिक रहा। लेकिन मरीजों को अधिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर कुछ सेवाएं बाधित रहने से मरीजों को थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सरकार उनकी सुनने को तैयार नहीं : विजय
एनएचएम के हड़ताली कर्मचारी हर्बल पार्क में धरने पर बैठे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) यूनियन के प्रधान विजय ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को लगातार अनदेखा कर रही है। बार-बार उन्होंने मांग उठाई है, लेकिन उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है। सरकार की पॉलिसी के अनुसार तीन साल से जो कर्मचारी काम कर रहे थे उन्हें पक्का किया गया है, लेकिन वह करीब आठ साल से विभाग में कार्यरत है, उनकी तरफ सरकार का कोई ध्यान नहीं है। इसी को लेकर वह दो दिन की सांकेतिक हड़ताल पर गए है।
ये है मुख्य मांगे :
कर्मचारियों ने मांग की है कि उनका तीन माह से रुका हुआ वेतन दिया जाए, कर्मचारियों की छटनी पर रोक लगाई जाए, उन्हें तीन वर्षीय पॉलिसी के तहत पक्का किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द अपने गलत निर्णयों को वापस ले। कुछ कर्मचारी ओवरएज भी हो चुके है, जिन्हें कि कहीं और कार्य मिलना भी संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती तो वह अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।