जगाधरी के बर्तन निर्माता जएसटी को जगाधरी की मैटल इंडस्ट्रीज के लिए संजीवनी मान रहे हैं। वहीं कुछ उद्यमियों में इसे लेकर घबराहट भी है। राज्यों में करों की दर अलग-अलग होने के कारण जगाधरी के बर्तन दूसरे राज्यों में बनने वाले बर्तनों से महंगे हैं, इसके चलते बर्तन उद्योग वेंटिलेटर पर अंतिम सासें गिन रहा है। ऐसे में जगाधरी के बर्तन निर्माताओं में जीएसटी से काफी आस है। जीएसटी लागू होने पर टैक्स की दर क्या होगी, इसे लेकर भी उद्यमियों की उत्सुकता बनी हुई है। अमर उजाला ने बर्तन निर्माताओं की राय जानी।
जीएससी को लेकर छोटे और बड़े सभी उद्यमी बहुत उत्साहित है। अब तक जीएसटी का जो प्रारूप सामने आया है, उससे लगता है कि इसके लागू होने से उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और देश तरक्की की राह पर आगे बढे़गा। लेकिन उद्यमियों के जहन में एक डर बैठा हुआ है कि कही इससे अफसरशाही और हावी न हो जाए। देखा जाए तो जीएसटी को लेकर सरकार की सोच को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी अफसरों पर ही है। ऐसे में यदि वे इसका गलत इस्तेमाल करते हैं तो उद्यमियों और व्यापारियों का शोषण बढे़गा।
राज चावला, डिस्ट्रिक प्रेजीडेंट, हरियाणा चैंबर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज
जीएसटी में बर्तनों पर करों की दर 12 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस समय एल्युमीनियम के बर्तनों पर लगभग 8 प्रतिशत टैक्स है। यदि जीएसटी में 12 प्रतिशत तक टैक्स होता है तो भी बर्तन निर्माता इससे संतुष्ट होंगे। लेकिन इससे अधिक टैक्स होने पर बर्तनों के दाम बढ़ जाएंगे। इसका खामियाजा ग्राहक को भुगतना पड़ेगा। वैसे भी एल्युमीनियम और स्टील के बर्तन गरीब व मध्यम वर्ग ही अधिक खरीदते हैं। ऐसे में एल्युमीनियम के बर्तनों पर कर की दर अधिक नहीं होनी चाहिए।
राजेश खरबंदा, डायरेक्टर, विमल इंडस्ट्रीज
स्टील के बर्तनों पर इस समय करीब साढे़ 18 प्रतिशत टैक्स है। उम्मीद है कि जीएसटी लागू होने पर बर्तनों पर टैक्स की दर इसके आसपास ही रहेगी। बर्तन निर्माताओं के लिए जीएसटी बहुत फायदेमंद है। इसके लागू होने से बर्तन निर्माता देश भर में कही भी आसानी से एक नंबर में बर्तन भेज सकेंगे। इससे टैक्स की चोरी भी रुकेगी, जिससे सरकार को अधिक राजस्व मिलेगा।
पवन सोनी, बर्तन निर्माता व वाइज प्रेजीडेंट, रिरोलिंग एसोसिएशन
जीएसटी को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है। लेकिन असलियत जीएसटी लागू होने के बाद ही सामने आएगी। जीएसटी लागू होने से अधिकारियों की पावर बढ़ जाएगी। यदि सरकार अफसरशाही को कंट्रोल नहीं कर पाई तो जीएसटी उद्यमियों के लिए नुकसानदेह साबित होगा।
दर्शनलाल खेड़ा बर्तन निर्माता
फिलहाल जीएसटी बर्तन निर्माताओं के लिए फायदेमंद प्रतीत हो रहा है, लेकिन सही तस्वीर इसके लागू होने के बाद ही सामने आएगी। बर्तन निर्माता पहले ही इंस्पेक्टरी राज से त्रस्त हैं। यदि जीएसटी लागू होने पर भी इससे छुटकारा न मिला तो यह उद्यमियों को रास नहीं आएगा।
करतार सिंह मल्होत्रा, बर्तन निर्माता
जीएसटी लागू होने पर बर्तनों का कारोबार बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे जगाधरी में तैयार होने वाले बर्तन एक नंबर में देश के कोने-कोने में जा सकेंगे। देश भर में एक समान टैक्स होने पर जगाधरी के बर्तन दूसरे राज्यों में तैयार होने वाले बर्तनों से प्रतिस्पर्धा की दौड़ में बने रहेंगे।
सुंदर लाल बतरा, महासचिव, द जगाधरी मैटल मैन्युफैक्चरर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन