नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने कहा कि 23 फरवरी को हर हाल में एसवाईएल नहर की खुदाई शुरू की जाएगी। हरियाणा वासियों को उनका हक दिलाया जाएगा। अजय चौटाला मंगलवार को इनेलो के कार्यकर्ता सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। उनके साथ प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा भी थे।
पूर्व विधायक दिलबाग सिंह के कार्यालय में आयोजित इस सम्मेलन की अध्यक्षता पूर्व विधायक दिलबाग सिंह व जिला अध्यक्ष दलमीरा राम सैनी ने की। पत्रकारों से बातचीत में अभय चौटाला ने कहा कि कहा कि कांग्रेस और भाजपा एसवाईएल नहर के लिए गंभीर नहीं है।
वर्ष 1966 में अलग राज्य बनने के बाद हरियाणा को उसके हिस्से का पानी देने के लिए एसवाईएल पर काम शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन 11 साल तक इस पर कुछ नहीं हुआ। वर्ष 1977 में चौधरी देवीलाल की सरकार बनने के बाद उन्होंने इस पर काम शुरू करवाया।
एसवाईएल की भूमि के अधिग्रहण के लिए 20 फरवरी, 1978 को नोटिफिकेशन जारी कंरवाया। चौधरी देवीलाल के मुख्यमंत्री रहते हुए ही 31 मार्च, 1979 को एसवाईएल के निर्माण के लिए पंजाब सरकार को पहली किस्त के रूप में एक करोड़ रुपये दिए गए। उसके बाद चौधरी देवीलाल की सरकार चली गई।
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर फिर एसवाईएल का काम रुक गया। 1987 में चौधरी देवीलाल के फिर मुख्यमंत्री बनने पर एसवाईएल का काम जोरों से शुरू हुआ, लेकिन आतंकवाद के दौरान एसवाईएल से जुड़े इंजीनियरों और मजदूरों की हत्या होने से काम रुक गया।
चौधरी देवीलाल ने 20 फरवरी, 1991 को देश के उपप्रधानमंत्री रहते हुए इस नहर के अधूरे निर्माण को पूरा करवाने की जिम्मेदारी सेना की इंजीनियरिंग इकाई बीआरओ को देने के आदेश जारी करवाए। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल ने सदन में माना था
कि एसवाईएल पर सबसे ज्यादा निर्माण कार्य चौधरी देवीलाल की सरकार के दौरान हुआ है। प्रदेश और केंद्र में फिर कांग्रेस की सरकार बनने पर नहर निर्माण का रुक गया। इनेलो नेताओं ने कहा कि 1999 में फिर से प्रदेश में चौधरी देवीलाल की नीतियों पर चलने वाली चौधरी ओमप्रकाश चौटाला की सरकार बनी।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले पर जल्दी सुनवाई के लिए याचिका दायर की। आखिरकार 15 जनवरी, 2002 को सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हरियाणा के पक्ष में आया। इसमें पंजाब को नहर बनाने के निर्देश दिए गए। पंजाब में तब तक कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में आ गई।
उन्होंने नहर खुदाई करने की बजाय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी। इनेलो सरकार की जोरदार पैरवी के चलते पंजाब सरकार की पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो गई तो उसके बाद पंजाब की कांग्रेस सरकार ने पंजाब विधानसभा में नदी जल समझौते रद्द करने वाला एक बिल पारित करते हुए मामले को फिर लटका दिया।
इसी बीच इनेलो की सरकार चली गई। हरियाणा और केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद दस सालों तक कांग्रेस ने इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि अब हमें एसवाईएल का पानी लाना है और हरियाणा का हक दिलाना है।
सम्मेलन में पूर्व विधायक ईश्वर पलका, प्रदेश अध्यक्ष जाहिद खान, अश्वनी दत्ता, दलमीरा राम सैनी, राज कुमार बुबका, चरण सिंह, राज कुमार सैनी, सेवा सिंह, डिप्टी मेयर रामपाल, अजय बिल्लू, मधु सूदन शर्मा, राजिंदर बजाज, गुरजिंदर खेड़ी, गुरप्रीत सिंह चावला,
जसबीर बिट्टू, इंदर मोहन पप्पी, जरनैल सिंह पंजेटा, कमल कंबोज, राम चंद्र जग्गा, सर्वप्रिय जठलाना, सुरेश बुडिय़ा, माणिक बुड़िया, रंजीत सिंह आदि कार्यकर्ता मौजूद थे।