निजी परमिटों के विरोध में सोमवार को रोडवेज कर्मचारियों ने यमुनानगर बस स्टैंड पर दिनभर धरना-प्रदर्शन किया। हालांकि उनकी रणनीति मंगलवार से चक्का जाम करने की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने शाम साढ़े चार बजे से ही बसों की आवाजाही को रोक दिया। रात तक चक्काजाम रहने से यात्री बे-बेस नजर आए और गंतव्य तक पहुंचने के लिए साधन की तलाश में भटकना पड़ा। रोडवेज कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि उनकी ओर से मंगलवार को भी चक्काजाम रखा जाएगा। यदि सरकार ने निजी परमिट वापस नहीं लिया तो प्रदेश भर में आंदोलन तेज होगा।
हरियाणा रोडवेज ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर रोडवेज कर्मचारियों ने सोमवार सुबह दस बजे से यमुनानगर बस स्टैंड पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसकी अध्यक्षता डिपो प्रधान रतन सिंह कलानौर, वरयाम सिंह ने की। जबकि मंच का संचालन नंदलाल व फूल कुमार ने किया। इस दौरान कर्मचारियों ने निजी परमिटों के विरोध में प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रतन सिंह कलानौर ने कहा कि वर्तमान सरकार पिछली सरकारों के नक्शे कदम पर चल रही है। प्रदेश सरकार रोडवेज विभाग को निजी हाथों में देने का प्रयास कर रही है।
जबकि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि सभी विभागों से ठेका प्रथा को बंद किया जाएगा। साथ ही विभागों का निजीकरण नहीं होगा और सभी विभागों में पक्की भर्ती की जाएगी। लेकिन भाजपा ने सत्ता में आते ही कर्मचारी विरोधी फैसले लेना शुरू कर दिए। कई विभागों के कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया, लेकिन रोडवेज विभाग का निजीकरण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रोडवेज का निजीकरण जनहित में नहीं है। कर्मचारियों को वरयाम सिंह, हरिनारायण शर्मा, सुमित सूद, प्रताप सिंह, नंदलाल ने भी संबोधित किया। मौके पर अमर सिंह बकाना, सुमित सूद, ईश्वर लाल, श्याम लाल नरवाल, रामशरण, अशोक कुमार, महीपाल सौढे, जसबीर सिंह व आजाद सिंह मौजूद रहे।
चक्का जाम से विद्यार्थियों व नौकरीपेशा लोगों को हुई खासी परेशानी
दिनभर धरना-प्रदर्शन करने के बाद रोडवेज कर्मचारियों ने शाम साढ़े चार बजे से डिपो से किसी बस को नहीं चलने दिया। वहीं, डिपो की बाहर से आई बसों को भी वर्कशॉप में भेज दिया गया। इस दौरान रोडवेज कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इसकी सूचना पाकर प्रशासनिक अधिकारी पुलिस बल समेत मौके पर पहुंचे और रोडवेज कर्मचारियों से बातचीत कर समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने और रात तक भी चक्का जाम रखा। इस दौरान सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थी व नौकरीपेशा वर्ग को हुई, जो सुबह शहर में आए, लेकिन शाम के वक्त लौटते हुए उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने को बस नहीं मिल पाई। बस स्टैंड पर पहुंची विद्यार्थी रेनू, अंशिका, सीमा ने कहा कि वह शहर के शैक्षणिक संस्थान में रोज बस के जरिए पढ़ने आते हैं, लेकिन लौटते वक्त चक्का जाम का पता चला। अब वह गंतव्य तक पहुंचने को अन्य साधन की तलाश में है।