फोग सीजन में जिले से गुजर रहे एनएच-73, 73ए व स्टेट हाइवे से निकलना खतरनाक साबित होगा, चूंकि कहीं सफेद पट्टी नहीं है तो कहीं फीकी पड़ चुकी है। हाइवे के रास्तों व मोड़ों से रिफ्लेक्टिव संकेत व वर्म भी गायब हैं। फिलहाल सुबह के वक्त हल्की धुंध पड़ रही है, जिसका सड़क हादसों के रूप में असर भी दिखने लगा है। किंतु इस दिशा में प्रशासन कुछ करता नहीं दिख रहा है। ऐसे में आगे बढ़ती धुंध जानलेवा साबित हो सकती है।
बता दें कि जिले से एनएच-73 (चंडीगढ़-रुढ़की), 73ए (जगाधरी-पावंटा) व स्टेट हाइवे (कुरुक्षेत्र-सहारनपुर) निकलते हैं। तीनों पर करीब 62 एक्सिडेंटल प्वाइंट हैं। गड्ढों के अलावा हाइवे के रास्तों व (तीर्व) मोड़ों पर संकेतक व वर्म न होने से हर वर्ष सैकड़ों हादसे हो रहे हैं। इनमें 60 फीसदी आंकड़ा दिसंबर से फरवरी माह के बीच फोग सीजन के दौरान हादसों का रहता है।
बीते वर्षों फोग सीजन को मद्देनजर रख हादसों पर अंकुश लगाने को सभी हाइवे मार्गों पर सफेद पट्टी खिंचवाई गई, किंतु इस बार ऐसा नहीं किया गया है। आलम यह है कि घोषित एक्सिडेंटल प्वाइंट सहित अन्य मार्गों पर कही सफेद पट्टी गायब है। कई बार वाहन चालक खुद के साथ अन्य वाहन चालक व उसमें सवार लोगों को भी हादसे की चपेट में ले लेता है। बीते वर्षों में यह लापरवाही कई हादसों की वजह बनी, बावजूद इसके विभाग इसको लेकर संजीदा नहीं दिख रहा है। जबकि हर जिला रोड सेफ्टी मीटिंग में यह मुद्दा उठाया जाता है।
बीते दिनों हुए हादसे पर एक नजर:-
25 नवंबर- स्टेट हाईवे कुरुक्षेत्र-सहारनपुर पर गांव दामला के समीप सड़क पार करते हुए अज्ञान वाहन की टक्कर से 14 वर्षीय स्कूली छात्र अक्षय की मौत।
25 नवंबर- गांव जुब्बल के पास कार की टक्कर से रादौर निवासी युवा भाजपा अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर के भतीजे चंद्रवीर उर्फ हनी (24) की मौत।
26 नवंबर- गांव मंडेबर के समीप डंपर की टक्कर से बाइक सवार गांव हरनौल निवासी कर्म सिंह (43) की मौत।
28 नवंबर- गांव अलीपुरा के समीप कार की टक्कर से अलीपुरा निवासी यमुनानगर रोडवेज चालक रमेश कुमार (50) की मौत।
29 नवंबर- बिलासपुर-रणजीतपुर मार्ग पर गांव बिहटा के समीप पेड़ से टकराया ट्रैक्टर बिहटा निवासी चालक नवाब अली की मौत।
1 दिसंबर- कुरुक्षेत्र-सहारनपुर स्टेट हाइवे पर एलपीजी सिलेंडरों से भरा ट्रक डिवाइडर से टकराकर पलट गया और सारे सिलेंडर हाईवे पर बिखर गए। गनीमत रही पीछे से कोई वाहन नहीं आ रहा था और सिलेंडर नहीं फटा, अन्यथा यह बड़ा हादसा हो सकता था।
2 दिसंबर- गांव पाबनी के समीप दो बाइकों की टक्कर में एक बाइक पर सवार गांव कूलचंदु निवासी जसवंत सिंह (26)की मौत।
हाइवे के रास्तों पर वर्म और संकेतक नहीं
सफेद पट्टी के अलावा तीनों हाइवे के रास्तों व मोड़ों पर वर्म व संकेतक भी नहीं हैं। सड़क और सड़क से लगते कच्चे रास्ते के बीच काफी अंतर है। जबकि यह दोनों एक निर्धारित लेवल पर होने चाहिए, किंतु विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। लेवल सही न होने से चालक वाहन (विशेषकर दोपहिया) को मार्ग से नीचे उतरते समय स्किट व अनियंत्रित होने से गिरकर चोटिल या पीछे से आ रहे वाहन की चपेट में आ जाते हैं। इसके अलावा हाइवे के रास्तों व मोड़ों पर पूर्व सूचना बोर्ड नहीं हैं, जो फोग सीजन में रिफ्लेक्टिव टेप व पेंट से रंगे होने चाहिएं। ताकि धुंध में दूर से ही वाहन चालक को आगे आने वाले मोड़, स्पीड ब्रेकर व अन्य स्थिति बारे में नजर आ जाए।
हाईवे पर सफेद पट्टी समेत अन्य कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है, जल्द ही यह कार्य पूरा होगा।
आरके टिंडवाल, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी (बीएंड आर)।