अबके करवाचौथ व्रत रखने वालीं विवाहित महिलाओं और युवतियों को अधिक परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी। चूंकि जिले में देर शाम आठ बजकर 51 मिनट पर चांद का दीदार हो जाएगा। जबकि बीते वर्षों में सुहागिनों ने नौ बजे के बाद चांद सहित अपने पति का दर्शन कर व्रत खोला था। पर्व को लेकर मंगलवार को बाजार में सजने-सवरने से लेकर व्रत की सरगी व पूजन सामग्री तक की जमकर खरीदारी हुई। बाजार में उमड़ी भीड़ के कारण शहर के कई मार्गों पर सुबह से देर शाम तक जाम की स्थिति बनी रही। ब्यूटी पार्लर, कॉसमेटिक दूकानें और मेहंदी के स्टॉल रात में भी खुले रहे, जहां महिलाओं व युवतियों ने सजने संवरने में कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी।
5:53 से लेकर 6:51 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषी पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवाचौथ का व्रत किया जाता है। इस दिन विवाहिताएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम के समय पूर्ण श्रृंगार कर करवाचौथ की कथा सुनी जाती है। कथा के बाद किसी बुजुर्ग को करवा देकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। रात्रि के समय चंद्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे आर्घ देने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम पांच बजकर 53 मिनट से लेकर छह बजकर 51 मिनट तक का है। अबके रात आठ बजकर 51 मिनट पर चांद निकलेगा।
सौ साल बाद करवाचौथ पर बना महासंयोग
ज्योतिषों के अनुसार इस बार करवाचौथ पर्व बुधवार को मनाया जा रहा है। बुधवार को शुभ कार्तिक मास का रोहिणी नक्षत्र है। इस दिन चंद्रमा अपने रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे और बुध अपनी कन्या राशि में रहेंगे। इसी दिन गणेश चतुर्थी और कृष्ण की रोहिणी नक्षत्र भी है। बुधवार भगवान कृष्ण व गणेश दोनों का दिन है। यह अद्भुत संयोग सौ साल बाद बना है, जो करवाचौथ के व्रत को और भी शुभ फलदायी बना रहा है।