निजी परमिट के विरोध में चार दिन से जारी रोडवेज कर्मियों की हड़ताल गुरुवार को समाप्त हो गई। मांगों पर सहमति बनने के बाद रोडवेज यूनियन ने शाम करीब साढ़े पांच बजे हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। शाम करीब पौने छह बजे पहली बस अंबाला के लिए रवाना की गई। इसके बाद सभी लंबे रूट की बस सेवा सुचारू कर दी गई। चार दिन की हड़ताल से रोडवेज को करीब 45 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
सरकार ने रोडवेज यूनियन के उपप्रधान अशोक कुमार, कार्यकारी सदस्य रामशरण, उपप्रधान रतन सिंह, प्रेम बैंडी, साहब सिंह को सस्पेंड कर दिया गया था। लेकिन शाम को सभी को बहाल कर दिया। रोडवेज कर्मचारी नेता प्रताप सिंह हरिनारायण शर्मा, महीपाल सोडे, विनोद त्यागी, सर्बती देवी, रेखा, पूनम शर्मा, अशोक शर्मा, हरिओम कश्यप, सुरेंद्र, सतीश राणा ने कहा कि सरकार ने उनकी मांग पर सहमति जताई है। सरकार जब नई पालिसी लाएगी तो यूनियन की राय भी लेगी। नेताओं ने बताया निजी परमिट जारी कर सरकार विभाग को निजी हाथों में देना चाहती है। लेकिन सरकार की इस मंशा को कभी भी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
साढे पांच बजे तक यात्री रहे परेशान
रोडवेज की हड़ताल के चौथे दिन भी बसे न चलने से यात्री परेशान रहे। एक तो गर्मी का मौसम और ऊपर से रोडवेज की बसें भी बंद। दोनों ने मिलकर यात्रियों के सफर को पहले से ज्यादा मुश्किल कर दिया है। बसें नहीं चल रही। मजबूरन यात्रियों को यहां वहां भटकना पड़ रहा है। लोगों को मजबूरी में निजी बसों व ऑटो में सफर करना पड़ रहा है। रोडवेज की हड़ताल शाम साढ़े पांच बजे तक जारी रही। इसके बाद कर्मी काम पर लौट आए। जिसके बाद बस सेवा शुरू कर दी गई। बस सेवा शुरू होने से यात्रियों ने राहत की सांस ली।
करीब 45 लाख का नुकसान
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण यमुनानगर डिपो को प्रतिदिन 14 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। पहले दिन शाम करीब साढ़े चार बजे रोडवेज की हड़ताल शुरू हुई थी। गुरुवार को चौथे दिन करीब साढ़े पांच बजे हड़ताल खत्म हो गई। ऐसे में अब तक रोडवेज को करीब 45 लाख का नुकसान हो चुका है। डिपो में 166 बसें हैं। जिनमें से 157 ऑनरूट रहती हैं। डिपो की बसें 40 रूटों पर चलती हैं।