किसानों का सोना (गेहूं) खेतों में पककर तैयार है, जल्द ही यह बिकने मंडियों में पहुंचेगा। हालांकि एक अप्रैल से मंडियों में खरीद का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन पहले दिन मंडियों में गेहूं की आवक नहीं हुई। जगाधरी अनाज मंडी को गेहूं के साथ ही सुविधाओं का भी इंतजार है। सीजन शुरू होने के बावजूद मंडी में अव्यवस्थाओं की भरमार है। जगह-जगह गंदगी व दूषित पानी के साथ शौचालयों की हालत खस्ता है। उधर, छछरौली अनाज मंडी में अबकी गेहूं की आवक व खरीद-फरोख्त का रिकॉर्ड ऑनलाइन रखने की तैयारी है।
जगाधरी अनाज मंडी में गेहूं की आवक व खरीद के सीजन शुरू होने पर भी मार्केट कमेटी द्वारा सफाई, शौचालयों व पेजयल सुविधा की ओर ध्यान नहीं दिया गया। आलम ये है कि मंडी में बने शौचालयों के दरवाजे टूटे हैं और अंदर गंदगी व बदबू की भरमार है। पेयजल बूथों पर भी सफाई के अभाव में जगह-जगह गंदगी फैली है। मंडी में जगह-जगह कूड़ा व गंदगी युक्त पानी जमा है। इन परेशानियों से भी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
छछरौली मंडी में ऑनलाइन रखा जाएगा रिकॉर्ड
प्रदेश सरकार की ओर से मंडियों में गेहूं की आवक व खरीद के कार्य का रिकॉर्ड ऑनलाइन रखने की योजना है। जिले में छछरौली अनाज मंडी में ऐसा किया जाएगा। इसमें मंडी में आने वाले गेहूं आने व उसके बिकने की सारी जानकारी ऑनलाइन रखी जाएगी और हर समय ऑनलाइन कहीं भी यह पता लगाया जा सकेगा कि मंडी में कितना गेहूं आया और कितनी खरीदी जा चुकी है। इसके लिए विभाग की ओर से पूरी तैयारी कर ली गई है।
रात में रुकने के लिए मंडियों में नहीं कोई इंतजाम
बीते वर्ष जिले की मंडियों में किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जो किसान दूर से गेहूं बेचने आते हैं, उनके लिए रात में रुकने के लिए कोई इतजाम नहीं है। उन्हें ऐसे ही रात गुजारनी पड़ती है और बरसात आने पर गेहूं की भीगने से बचाने संबंधी दिक्कत होती है। सरकार जो ऑनलाइन की सुविधा देने जा रही है, उससे किसान को नुकसान होगा, क्योंकि किसान आढ़ती से दूर हो जाएगा। आढ़ती किसान का एटीएम होता है, ऐसे में उसे जरूरत पड़ती है तो वह उससे पैसे नहीं ले पाएगा।
हरपाल, प्रदेश सेक्रेटरी, भारतीय किसान यूनियन।
शौचालयों की व्यवस्था ठीक नहीं, गेहूं की रखवाली को भी कोई नहीं
बीते वर्ष मंडियों में किसानों के सामने कई परेशानियां आई थी। जैसे शौचालय की व्यवस्था ठीक न होना और सबसे अधिक दिक्कत उन किसानों को होती है, जो दूर-दराज से यहां गेहूं बेचने आते हैं। उनके रात के वक्त मंडी में रुकने की कोई व्यस्था नहीं है। किसानों की गेहूं की रखवाली के भी कोई इंतजाम नहीं है। इस कारण रात के वक्त गेहूं चोरी होने की आशंका रहती है। प्रशासन को समय रहते मंडियों में इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
रामबीर, प्रधान, भारतीय किसान संघ।
खाद्यपूर्ति विभाग ने पांच एजेंसियों को खरीद के लिए ठेका दिया है। जो यमुनानगर की 13 मंडियों में खरीद करेगी। बीते वर्ष इन एजेंसियों ने दो लाख 93 हजार 883 मैट्रिक टन गेहूं की खरीद की थी। सरकार ने करीब साढ़े तीन लाख मैट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा है। क्षेत्र में गेहूं की बजाई की गई है, उसका रकबा 88 हजार हेक्टेयर था, जिससे जिले में अच्छी पैदावार हुई है। विभाग की ओर से जो पांच एजेंसियां लगाई है। उनमें फूड एंड सप्लाई, हेफेड, एग्रो, एफसीआई, वेयर हॉउस शामिल हैं, जोकि अपने हिसाब से मंडियों में खरीदारी करेगी।
सुरेंद्र धोलारा, डीएफएससी, जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।
किसानों की सुविधा के लिए मंडी में पांच जगह शौचलय और चार वाटर कूलर लगाए गए हैं। मंडी की सफाई भी पूरी तरह से करवा दी गई है। किसानों को कोई दिक्कत न हो, इसके इंतजाम किए गए हैं। शौचालय के दरवाजे टूटे हैं, उन्हें भी ठीक करने के लिए बोल दिया है। पतझड़ होने के कारण पेड़ों पत्ते जरुर गिर रहे है, उसे भी साफ करवा रहे हैं।
संत कुमार, सेक्ट्री, मार्केट कमेटी, जगाधरी।