संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। गांव धौलरा स्थित बलभद्र मंदिर में बुधवार को मेला लगा। इसमें करीब 20 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान बलभद्र की पर पूजा-अर्चना कर प्रसाद चढ़ाया। साथ ही परिवार के लिए सुख-शांति की कामना की। मेले में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
मेले में दुकानदारों ने दुकानें सजाई, जहां क्षेत्र के लोगों ने खरीदारी की। मेले में भक्तों के लिए ओमप्रकाश धौलरा, संजू धौलरा व अन्य ग्रामीणों ने भंडारे का आयोजन किया। भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। गांव के पूर्व सरपंच संजू ने बताया कि मेले का आयोजन महाभारत काल से हो रहा है। मंदिर में स्थापित मूर्ति पूर्व खोदाई के दौरान मिली थी। इसे गांव के लोगों ने पीपल के पेड़ के नीचे रख दिया था।
उन्हीं दिनों जगाधरी के सेठ बंसीलाल के यहां कोई संतान नहीं थी। तभी उनके सपने में भगवान बलभद्र जी ने दर्शन दिए और सेठ बंसीलाल को गांव धौलरा में उनका मंदिर बनवाने को कहा।
इस पर सेठ बंसीलाल ने गांव में पेड़ के नीचे रखी भगवान बलभद्र जी की मूर्ति को वहां से उठाकर बैल गाड़ी से जगाधरी लाने की योजना बनाई, लेकिन जैसे ही सेठ बंसीलाल मूर्ति को बैल गाड़ी पर गांव की सीमा के बाहर निकलने लगे तो बैल अंधे हो गए। इसके बाद सेठ को गलती का एहसास हुआ।
सेठ बंसीलाल ने तभी भगवान बलभद्र जी का मंदिर गांव में बनवाया। इसके बाद सेठ बंसीलाल के घर बेटे ने जन्म लिया। तब से गांव में हर वर्ष सतवा तीज के दिन मेले लगता है। भगवान बलभद्र जी के मंदिर में लोग मनोकामना लिए आते हैं।
हजारों लोगों की संतान होने की कामनाएं पूरी हो चुकी हैं। विधानसभा व लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले हर पार्टी के नेता यहां माथा टेकते हैं खोदाई के दौरान मिली भगवान बलभद्र जी की मूर्ति किस धातु की बनी है, इसके बारे में आज तक पता नहीं चल पाया। भगवान बलभद्र जी की मूर्ति पर कोई रंग नहीं ठहरता। कई बार उन्होंने मूर्ति पर रंग किया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही रंग उतर जाता है।