यमुनानगर/खिजराबाद। पहाड़ों से उतरने के बाद यमुना नदी का मैदानी इलाके में पहला पड़ाव यमुनानगर जिले में होता है। यमुना नदी में बाढ़ का खतरा हर साल बना रहता है। इतिहास के पन्नों में यमुना नदी में कई बार भीषण बाढ़ आ चुकी है। इसके मद्देनजर जिला प्रशासन द्वारा हर साल बाढ़ बचाव कार्य करवाए जाते हैं। इसके तहत यमुना नदी के किनारों पर स्टड बनवाए जाते हैं, ताकि बाढ़ आने पर यमुना का पानी साथ लगते गांवों में न घुस जाए। लेकिन इस बार बाढ़ बचाव कार्यों को लेकर जिला प्रशासन सुस्त नजर आ रहा है। स्थिति यह है कि अब तक नदी के किनारों पर स्टड बनाने के टेंडर तक नहीं हुए हैं। पिछले वर्ष बाढ़ राहत कार्यों के लिए सरकार द्वारा करीब 15 करोड़ रुपये का बजट सरकार द्वारा जारी किया गया था। अबकी बार अभी तक किसी भी साइट पर बाढ़ बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है। इससे यमुना किनारे बसे गांवों के लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लग गया है। यमुना किनारे बसे क्षेत्र के लोग दहशत में हैं।
इन गांवों को बाढ़ का खतरा
गांव माली माजरा, नवाजपुर, लाक्कड, लेदी, बेलगढ़, टापू कमालपुर, होदरी, लापरा, बीबीपुर, मांडेवाला, खानूवाला, आंबवाली, टिबडियों, काटटरवाली, रणजीतपुर, रामपुर गेंडा, रामपुर बिहटा, कलेसर और भंगेडा सहित दर्जनों ऐसे गांव हैं जहां हर साल बाढ़ का खतरा बना रहता है। इन गांवों में बाढ़ राहत के काम हर साल होते हैं। इन गांवों की जमीन पर नदी के अलावा नालों का पानी भी खेतों में तबाही मचाता है।
अवैध खनन से बाढ़ का खतरा बढ़ा
यमुना नदी के पास लगते गांवों के किसान संजीव, अशोक कुमार, सतीश कुमार, मनीष, इलमचंद, सुशील कुमार, जोगिंद्र सिंह और सुभाष नंबरदार ने बताया कि पिछले कई महीनों से बेलगढ़ के साथ लगते एरिया में वैध खनन पूरे जोरों पर है। वहीं चोरीछिपे अवैध खनन भी हो रहा है। अवैध खनन माफिया ने बेलगढ़ एरिया के साथ लगती यमुना की पटड़ी को भी खोद डाला है। ऐसे में यदि ऐसे में अबकी बार बाढ़ आती है तो यमुना नदी के साथ लगते गांवों में पानी घुसने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के बचाव कार्यों के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। ठेकेदारों को निर्देश दिए गए हैं कि 20 जून तक बाढ़ बचाव कार्य पूरे कर लें। बरसात से पहले सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
मनीष देसवाल, एसडीओ, सिंचाई विभाग।