संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने के बजाय अपने हुनर को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। कॉस्मेटिक, सिलाई-कढ़ाई, कपड़ा कटिंग और डिजाइनिंग जैसे कामों को अपनाकर महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहयोग दे रही हैं।
कई महिलाओं ने किराये की दुकान लेने के बजाय घर या उपलब्ध स्थान पर ही बुटिक और प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए हैं। महिलाओं का कहना है कि स्वरोजगार से उन्हें अपनी मेहनत का सीधा लाभ मिलता है। शादी-विवाह के सीजन में काम इतना बढ़ जाता है कि खाना खाने तक की फुर्सत नहीं मिलती। इसके बावजूद काम के प्रति लगाव और अपनी कमाई का उत्साह उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अ
व्यासपुर क्षेत्र के गांव सुंदर बहादुरपुर शेरगढ़ की प्रवीन रानी ने प्रशिक्षण लेने के बाद सिलाई-कढ़ाई का अभ्यास किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपना बुटिक शुरू किया। इसके साथ ब्यूटी पार्लर का काम भी शुरू कर दिया। मेहनत से वह परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। स्वरोजगार ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया है और अब वह अपने फैसले लेने में भी पहले से अधिक सक्षम महसूस करती हैं।
गांव कैत की नजमा सिलाई-कढ़ाई का काम करने के साथ परिवार की जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं। उन्होंने अपने हुनर को आमदनी का जरिया बनाया। परिवार को उनके अपने पैरों पर खड़े होने पर गर्व है। नजमा की कमाई से परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग मिल रहा है। वह मानती हैं कि स्वरोजगार ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने का हौसला भी दिया।
गांव कैत की शकीला कॉस्मेटिक, सिलाई-कढ़ाई और बटन लगाने की ऑटोमेटिक मशीन के माध्यम से काम कर रही हैं। वह आसपास के गांवों के दर्जियों के काम में सहयोग करने के साथ स्वयं भी सिलाई-कढ़ाई करती हैं। पीको और अन्य डिजाइन तैयार करने में उनकी अच्छी पकड़ है। इसी हुनर के कारण क्षेत्र में उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। काम बढ़ने के साथ उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।
युवती को सजातीं प्रवीन रानी। स्वयं
युवती को सजातीं प्रवीन रानी। स्वयं