संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब घर की जिम्मेदारियों के साथ स्वरोजगार के नए अवसर तलाशकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। सिलाई-कढ़ाई, कटिंग, बुनाई, ब्यूटी पार्लर समेत फोटो फ्रेम और डिजिटल कटिंग जैसे कार्यों का प्रशिक्षण लेकर महिलाएं हुनर को कमाई का जरिया बना रही हैं।
ज्यादातर महिलाएं हाथ के हुनर को प्राथमिकता दे रही हैं, ताकि घर से ही काम शुरू कर सकें। इससे उन्हें रोजगार के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती और परिवार के आर्थिक बोझ को कम करने में भी मदद मिल रही है। चौराही गांव की ममता ने बताया कि महिलाओं के लिए घर से स्वरोजगार शुरू करना आसान विकल्प है।
उन्होंने सीएससी के साथ-साथ आटा चक्की का काम भी किया है। इससे उन्हें अपने स्तर पर आमदनी का साधन मिला और परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग करने का अवसर मिला। ममता का कहना है कि महिलाओं में हुनर की कमी नहीं है, जरूरत केवल उसे सही दिशा देने की है।
सिलाई-कढ़ाई, कटिंग, बुनाई और अन्य छोटे कामों का प्रशिक्षण लेकर महिलाएं घर बैठे अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से अपने हुनर को पहचानकर स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। घोड़ो पीपली गांव की रजनेश कुमारी ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए जागरूक करने का काम कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि गांवों में महिलाओं के साथ बैठक कर उन्हें अपने हुनर के माध्यम से रोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, कटिंग, बुनाई, ब्यूटी पार्लर समेत अन्य कार्यों का प्रशिक्षण लेकर कमाई शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उनका कहना है कि महिलाएं यदि छोटे स्तर से भी काम शुरू करें तो परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। स्वरोजगार से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे आर्थिक रूप से मजबूत बनती हैं।
गांव चौराही में आटा चक्की के पास मौजूद ममता देवी। स्वयं