संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। एक तरफ तो खेतों में जलभराव तो दूसरी तरफ खाद की किल्लत। इन हालात में किसान खेत में जूझ रहे हैं, तो उनके घर की महिलाएं खाद के लिए चूल्हा चौका छोड़कर तड़के ही केंद्र पर लाइन में खड़ी हो रही हैं। तपती धूप में सुबह से भूखे प्यासे कतारों में लगने के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल पा रहा है। चूंकि बारी आने तक खाद खत्म हो जाता है। यह हालात मंगलवार को कस्बे के अलावा सरावां में दिखने को मिले।
दरअसल मंगलवार को कस्बे के हैफेड केंद्र व सरावां के पैक्स केंद्र में दस दिन बाद खाद पहुंचा था। इस दौरान दोनों स्थानों पर केवल 540-540 बैग ही आए थे। खाद आने की सूचना मिलते ही दोनों जगहों पर महिलाओं सहित दर्जनों किसान सुबह पांच बजे से ही लाइन में लग गए। सरावां में तो सुबह नौ बजे खाद मिलना शुरू हुआ। लेकिन साढौरा में हैफेड कर्मचारियों ने पीओएस मशीन में स्टॉक अपलोड न होने की बात कहकर खाद नहीं दी। जब किसानों ने हंगामा किया तो उसके बाद ही आधार कार्ड लेकर खाद दी गई।
ब्लॉक समिति सदस्य अयूब तेवर ने आरोप लगाया कि हैफेड केंद्र पर सोमवार सुबह ही खाद आ गया था। लेकिन तब भी पीओएस मशीन मेें स्टॉक अपलोड होने की बात कहकर खाद नहीं दिया गया था। मांग के अनुरूप खाद कम आई। जिस कारण सैकड़ों किसानों को खाद नहीं मिल पाया। जिनका नंबर आया भी तो पांच की जगह दो ही बैग मिले। जबकि बाद में तो एक बैग ही दिया गया। ऐसे में काफी किसान खाद से वंचित रह गए। जिस कारण तड़के से लाइन में खड़े किसान निराश लौट गए।
भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव सैनी ने कहा कि किसानों को आवश्यकता अनुसार खाद उपलब्ध करवाने में विफल हो रही है। हर सीजन में खाद की किल्लत से किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। किसानों को खेत का काम छोड़कर खाद के लिए कतारों में लाइन में लगना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने खाद के पर्याप्त प्रबंध न किए तो किसान सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे।
हैफेड स्टोर कीपर सुरेंद्र ने बताया कि दो तीन दिन में दोबारा खाद उपलब्ध करवा दिया जाएगा। वहीं अब निजी दुकानों पर भी खाद उपलब्ध करवाने से किल्लत नहीं रहेगी।