यमुनानगर। आज की नारी ने यह साबित कर दिया है कि वह केवल घर की चारदीवारी और चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं है, बल्कि साहस और इच्छाशक्ति हो तो समाज के हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवा सकती है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं न केवल सशक्त हो रही हैं, बल्कि स्वावलंबन की नई इबारत भी लिख रही हैं।
जिले के हरनौल गांव की मनदीप रानी ने अपनी मेहनत से एक पशु से शुरू हुए सफर को एक सफल डेयरी व्यवसाय में तब्दील कर दिया है। शून्य से शिखर तक का सफर मनदीप रानी ने बताया कि उनके मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हमेशा से था। उन्होंने वर्ष 2010 में केवल एक पशु के साथ काम की शुरुआत की थी। संसाधनों के अभाव और आर्थिक तंगी के कारण वह लंबे समय तक अपने काम का विस्तार नहीं कर पा रही थीं।
साल 2019 उनके जीवन में एक नया मोड़ आया, जब वह मेघा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक मदद मिली, बल्कि सामाजिक सहयोग ने भी उनके हौसलों को नई उड़ान दी। सशक्त है मेघा समूह का ढांचा मेघा महिला समूह की सफलता के पीछे एक संगठित टीम का हाथ है।
प्रधान मनदीप रानी के साथ सचिव रजनी देवी और खजांची ममता अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। इसके अलावा समूह की सदस्य इंद्रजीत, पूजा, सुनीता, सुषमा, दर्शनी, मीना और सलिंद्रो भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। ये सभी महिलाएं मिलकर पशुपालन के साथ एक-दूसरे को आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रेरित करती हैं। संवाद
संकट को बनाया अवसर
मनदीप के जीवन में चुनौतियों का दौर तब आया, जब वर्ष 2022 में उनके पति अनिल शर्मा की निजी कंपनी की नौकरी छूट गई। इसी दौरान उनके पिता रामपाल शर्मा का भी निधन हो गया। परिवार पर अचानक आए इस आर्थिक संकट के समय मेघा समूह उनके साथ खड़ा रहा। मनदीप ने समूह से दो लाख रुपये का ऋण लिया और चार गोवंश खरीदकर अपने डेयरी व्यवसाय को पुनर्जीवित किया। आज दस पशुओं से हो रही अच्छी आय वर्तमान में मनदीप की डेयरी में नौ गोवंश, आठ बछड़ियां, एक भैंस और एक कटड़ी सहित कुल 10 दुधारू पशु हैं। उनके पति अनिल शर्मा भी अब डेयरी संचालन में सहयोग कर रहे हैं। इस व्यवसाय से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि बच्चों की शिक्षा और घरेलू खर्च भी सुचारू रूप से चल रहे हैं।