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बिना फौज मच्छरों से जंग लड़ रहा स्वास्थ्य विभाग

Fri, 25 Oct 2013 12:48 AM IST
यमुनानगर।
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डेंगू बुखार जिले में कहर ढा रहा है। मलेरिया पीड़िताें की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इनसे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास न सेना है और न ही सेनापति। आंकड़े भी स्वास्थ्य विभाग को डेंगू और मलेरिया के आगे बेबस साबित कर रहे हैं।
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जिले भर में डेंगू और मलेरिया बुखार पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन बीमारी को फैलाने वाले मच्छरों और उनके लारवा को फॉगिंग और पानी में तेल डालकर नष्ट किया जाता है। यह जिम्मेदारी फील्ड वर्करों की होती है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में फील्ड वर्कर के 28 पद हैं, जिनमें से 20 पद खाली पड़े हैं। केवल आठ फील्ड वर्कर पूरे जिले में फॉगिंग और लारवा को नष्ट करने में जुटे हैं। वर्करों की संख्या को देखते हुए यह कार्य असंभव प्रतीत होता है।

कांट्रेक्ट खत्म होने के बाद रामभरोसे लोग
मलेरिया और डेंगू पीड़ितों के इलाके में जाकर दवा वितरण, रक्त के नमूने लेने और मरीजों की जांच करने की जिम्मेदारी मल्टी पर्पस हेल्थ वर्कर की होती है। मलेरिया पीड़ित का चौदह दिन तक इलाज किया जाता है। इसके लिए मल्टी पर्पस हेल्थ वर्कर (एमपीएचडब्ल्यू) मरीज के घर जाकर उसे अपने सामने दवा खिलाते हैं। इसी प्रकार डेंगू पीड़ितों की पहचान कर उन्हें सिविल अस्पताल भिजवाते हैं। स्वास्थ्य विभाग में एमपीएचडब्ल्यू के कुल 99 पद हैं, जिनमें से 39 पद खाली हैं। कार्यरत एमपीएचडब्ल्यू में आठ नियमित और 52 कांट्रेक्ट बेसिस पर पांच महीने के लिए रखे हैं। इनका कांट्रेक्ट 15 नवंबर को खत्म हो रहा है, जबकि डेंगू का प्रकोप इस सीजन में चरम पर होता है, वहीं दूसरी तरफ जिले में मलेरिया केसों की संख्या 1435 तक पहुंच गई है। मलेरिया के केस साल भर मिलते रहते हैं। कांट्रेक्ट बेसिस पर रखे कर्मचारियों के रिलीव होने के बाद जिले में मात्र आठ एमपीएचडब्ल्यू शेष रह जाएंगे। विभाग के पास इनका कांट्रेक्ट बढ़ाने के लिए बजट नहीं है। ऐसे में 15 नवंबर के बाद मलेरिया और डेंगू के आगे स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह पंगु हो जाएगा।
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प्रभावित हो रहा रोकथाम का कार्य
मल्टी पर्पस हेल्थ वर्कर से काम करवाने का जिम्मा मल्टी पर्पस हेल्थ सुपरवाइजर का होता है। स्वास्थ्य विभाग में एमपीएचएस के 26 पद हैं, जिनमें से 23 पद खाली हैं। विभाग में एमपीएचएस की संख्या कम होने से मल्टी पर्पस हेल्थ वर्करों की ड्यूटी लगाने से लेकर मलेरिया और डेंगू प्रभावित इलाकों को चिन्हित करने का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

बायोलॉजिस्ट का पद तीन साल से खाली
अर्बन मलेरिया प्रोग्राम के तहत स्वास्थ्य विभाग में बायोलॉजिस्ट का पद है, लेकिन वर्ष 2010 से यह पद खाली है। बायोलॉजिस्ट का कार्य फील्ड में जाकर मच्छरों की पहचान कर उन्हें नष्ट करवाना है। इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग में इंसेक्ट कोलेक्टर की पोस्ट नहीं है। इंसेक्ट कोलेक्टर का काम फील्ड में जाकर मच्छरों को पकड़ना है। इसके माध्यम से यह पता चलता है कि किस इलाके में किस प्रकार के मच्छर अधिक हैं। जिले में डेंगू के कहर को देखते हुए कुरुक्षेत्र से इंसेक्ट कोलेक्टर को बुलाना पड़ता है, लेकिन वह सप्ताह में दो बार ही आ पाते हैं। बायोलॉजिस्ट और नियमित इंसेक्ट कोलेक्टर न होने की वजह से जिले में मच्छरों की पहचान और उन्हें नष्ट करने का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
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