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Yamuna Nagar News: आरक्षण रद्द नहीं होने पर जाएंगे हाईकोर्ट

Wed, 08 Jan 2025 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के वार्डों के किए गए आरक्षण को निवर्तमान पार्षदों ने चुनौती दी है। विपक्ष के साथ सत्तापक्ष के भी निवर्तमान पार्षद वार्डों के आरक्षण करने में इस्तेमाल मापदंडों पर सवाल उठा रहे हैं। निवर्तमान पार्षदों ने डीसी व एसडीएम को पत्र लिखकर वार्डों के आरक्षण में इस्तेमाल मापदंड व डेटा पर सवाल उठाए है। साथ चेताया कि आरक्षण रद न होने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
निवर्तमान पार्षदों का आरोप है कि वार्ड में जिस वर्ग की जनसंख्या व मतदाता अधिक हैं, उस वर्ग के बजाय अन्य वर्ग के लिए वार्ड को आरक्षित कर दिया गया है। उनकी मानें तो ऐसा वार्डों का आरक्षण करने में इस्तेमाल किए डेटा के कारण हुआ है, क्योंकि इस डेटा का वार्डों की वास्तविक स्थिति का मेल नहीं है। आरोप है कि जो बूथ नई वार्डबंदी में नहीं थे, वह मतदाता सूची में वार्डों में दिख रहे हैं। ऐसे ही जो बूथ नई वार्डबंदी में थे, वो मतदाता सूची में नहीं हैं।
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एसडीएम के नाम लिखे पत्र पर निवर्तमान पार्षद कर्मवीर गोंदवाल, नीरज राणा, संगीता सिंघल, प्रिंस शर्मा के हस्ताक्षर हैं। उनकी मानें तो मामले में और भी कई निवर्तमान पार्षद उनके साथ हैं। इनमें विपक्ष व पूर्व पार्षद दोनों शामिल हैं। सभी की वार्डों के आरक्षण को लेकर अपनी शंकाओं और आरोपों के सिलसिले में बुधवार को मिलने की रणनीति है। डीसी से मुलाकात में शंकाओं का समाधान नहीं हुआ तो वार्डों का आरक्षण रद्द करने की मांग करेंगे। ऐसा न होने पर हाईकोर्ट जाने पर मजबूर होंगे।
पूर्व पार्षद नीरज राणा व प्रिंस शर्मा ने बताया कि नई वार्डबंदी में जो बूथ वार्डों में नहीं थे, वो सात जनवरी को जारी मतदाता सूची में वार्डों में दर्शाए जा रहे हैं। उनके वार्ड 15 में भी आठ बूथ नई वार्डबंदी में नहीं थे, जो अब मतदाता सूची में दिख रहे हैं। इस तरह वार्ड के हर वर्ग की जनसंख्या में भी उतार-चढ़ाव हुआ, इसलिए संदेह है कि गलत डेटा के आधार पर वार्ड का आरक्षण हुआ।
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ऐसे में वार्ड में जिस वर्ग की जनसंख्या व मतदाता अधिक हैं, उसके बजाय अन्य वर्ग के लिए वार्ड को आरक्षित कर दिए जाने की आशंका है। इसलिए एसडीएम व डीसी को पत्र लिखकर वार्डों का आरक्षण किस आधार पर किया गया, इसमें क्या डेटा लिया गया और वह डेटा किस एजेंसी व किस समय का है, यह सवाल किए गए हैं। साथ ही इसमें वार्डों के किए गए आरक्षण को अस्वीकार करने की बात रखी गई।
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