संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। यमुना के शांत होते ही टापू कमालपुर में भी भूमि कटाव रुक गया। लेकिन, किनारों पर कट्टों में डाली जाने वाली मिट्टी की कमी पड़ गई। ऐसे में गांव के किसान पंकज चौहान ने भूमि कटाव को रोकने के लिए ढाई एकड़ का पांच लाख रुपये गन्ने की फसल और पांच एकड़ में खड़े पॉपुलर के पेड़ों को कुर्बान कर दिया। सबसे ज्यादा कटाव पंकज की भूमि में हुआ है।
पिछली साल डेढ़ किलोमीटर लंबा भूमि कटाव हुआ था, लेकिन इस बार यमुना के पानी ने गोलाई में 600 फीट तक कटाव किया है। जोकि टापू कमालपुर गांव की तरफ हुआ है। उधर, बीबीपुर, नहारपुर, बेलगढ़ और कलेसर में कटाव रुक गया। ऐसे में यहां के ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है।
टापू कमालपुर, पोबारी, उन्हेड़ी, लापरा, बीबीपुर, बेलगढ़, लाकड़मय प्रतापपुर, मंडौली घग्गड़, माली माजरा, कलेसर, बंजारा बांस, कोटड़ा काहन सिंह, गुमथला राव, नगली, संधाला, खानुवाला, तिहानो, रामगढ़ सवाई आदि गांवों में हो रहे भूमि कटाव को रोकने के लिए सिंचाई व पंचायत विभाग द्वारा तैयारी की जा रही है। 16 जेसीबी, 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली व 574 मनरेगा मजदूरों द्वारा एक लाख 91 हजार 400 मिट्टी के कट्टे नदी-नालों के तटबंधों को मजबूत करने के लिए रखे गए हैं।
बाढ़ से 11361 एकड़ फसल प्रभावित
बाढ़ का पानी आने से सबसे ज्यादा धान, गन्ना व पशु चारे को नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. आदित्य डबास ने बताया कि कुल 11361 एकड़ फसल व पशुचारे को नुकसान हुआ है। विभाग के अनुसार 0 से 25 प्रतिशत नुकसान में 2892 एकड़ धान, 773 एकड़ गन्ना, 302 एकड़ पशुचारा, 26 से 50 प्रतिशत में 1633 एकड़ धान, 784 एकड़ गन्ना, 173 एकड़ पशु चारा, 51 से 75 प्रतिशत में 1741 एकड़ धान, 286 एकड़ गन्ना व 402 एकड़ पशु चारा, 76 से 100 प्रतिशत में 1536 एकड़ धान, 450 एकड़ गन्ना व 123 एकड़ पशु चारा शामिल है। व्यासपुर में 384 एकड़, रादौर में 944 एकड़, छछरौली में 3173 एकड़, साढौरा में 556 एकड़, सरस्वतीनगर में 2199 एकड़, जगाधरी खंड में 4105 एकड़ फसल प्रभावित हुई है। जहां पर फसलों को 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान है उसमें 150 गांवों में 3281 एकड़ में धान, 59 गांवों में 836 एकड़ गन्ना व 93 गांवों में 565 एकड़ पशु चारा शामिल है।
125 घरों को नुकसान
बारिश की वजह से उन घरों को भी काफी नुकसान हुआ है जिनकी छत कच्ची है। कई जगह तो पूरी छत ढह गई तो कहीं लगातार पानी भरा रहने से दीवारें धंस गई। इससे घर गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं। प्रशासन ने लोगों से कहा है कि यदि किसी के घर को बारिश या बाढ़ की वजह से नुकसान पहुंचा है वह इस बारे में अपने खंड के बीडीपीओ या एसडीएम कार्यालय में जानकारी दे सकता है। अभी तक जिला प्रशासन के पास करीब 125 घरों की सूचना आई है। डीडीपीओ नरेंद्र सिंह ने बताया आवेदन करने वालों में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके घर को पहले नुकसान हुआ और वह अब सूचना दे रहे हैं।
उचित मुआवजा दे सरकार
भारतीय किसान यूनियन चढूनी ग्रुप के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना का कहना है इस बार भारी बारिश से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। सरकार को किसानों को भूमि और फसलों को उचित मुआवजा देना चाहिए। लेकिन यदि प्रशासनिक अधिकारी समय से तटबंधों पर कार्य कर लेते तो बाढ़ जैसे हालात पैदा नहीं होते।
पक्के तटबंध से रुकेगा कटाव
टापू कमालपुर के किसान विकास राणा ने कहा कि सरकार को नदियों किनारे होने वाले भूमि कटाव को रोकने के लिए पक्के तटबंध लगाने होंगे। तभी कुछ हो सकता है, अन्यथा किसानों की जमीन इसी तरह से यमुना नदी के तेज बहाव में समाती रहेगी। इसके अलावा सरकार को किसानों को उचित मुआवजा देना चाहिए।
भूमि कटाव रोकने के लिए लगाए गए पॉपुलर के पेड़ व गन्ना। संवाद