संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में वीरवार शाम हुई बारिश ने जिले की अनाज मंडियों में गेहूं की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। खुले में रखा गेहूं बारिश के पानी से भीग गया, जिससे किसानों और आढ़तियों को नुकसान की चिंता सताने लगी है। हालांकि कुछ जगहों पर गेहूं के बैग तिरपाल से ढके गए थे, लेकिन नीचे क्रेट न होने के कारण पानी बैग तक पहुंच गया और अनाज को नुकसान हुआ।
मंडियों का जायजा लेने पर सामने आया कि तिरपाल की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कई स्थानों पर आधे बैग तिरपाल के नीचे रखे गए थे, जबकि आधे खुले में ही पड़े रहे। ऐसे में हल्की बारिश भी अनाज को बचाने में नाकाफी साबित हुई। हर साल बारिश के दौरान होने वाली समस्या के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया गया।
जिले की 13 अनाज मंडियों में अब तक 3,02,901 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जबकि 2,78,567 मीट्रिक टन की खरीद की गई है। मंडियों से उठान केवल 236010 एमटी यानि 84.72 एमटी का ही हुआ है। इस बार खरीद एजेंसियों ने 3.36 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इसके पूरा होने की संभावना कम नजर आ रही है। खेतों से गेहूं की आवक लगभग समाप्त हो चुकी है और मंडियों में भी अब आवक घट गई है।
खरीद एजेंसियों की बात करें तो खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 89,009 मीट्रिक टन, हैफेड ने 1,43,258 मीट्रिक टन और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने 44,686 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है। व्यासपुर मंडी में 28,958.5 मीट्रिक टन, छछरौली में 34,035.1 मीट्रिक टन, गुमथला राव में 6,206 मीट्रिक टन, जगाधरी में 42,474 मीट्रिक टन, जठलाना में 4,525 मीट्रिक टन, खारवन में 4,856 मीट्रिक टन, प्रतापनगर में 39,059 मीट्रिक टन, सरस्वती नगर में 40,866.8 मीट्रिक टन, रादौर में 40,385 मीट्रिक टन, रणजीतपुर में 11,244 मीट्रिक टन, रसूलपुर में 8,407 मीट्रिक टन, साढौरा में 17,262 मीट्रिक टन और यमुनानगर मंडी में 289 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। बारिश से गेहूं के भीगने के बाद किसान और आढ़ती दोनों चिंतित हैं।
बारिश की चेतावनी के बाद भी नहीं किए पर्याप्त इंतजाम
प्रतापनगर। बारिश से अनाज मंडी में खुले में पड़ी अनाज की बोरियां भीग गई। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भी मार्केट कमेटी विभाग खुले आसमान के नीचे रखे सैकड़ों क्विंटल अनाज की बोरियां भीगने से नहीं बचा सका। बारिश के दौरान मजदूरों ने खुले में पड़ी अनाज की बोरियां तिरपाल से ढक दीं। वहीं अधिकतर अनाज की बोरिया खुले में पड़ी भीगती रही। खुले में पड़ी अनाज की बोरियां के नीचे से पानी निकलता रहा और बोरियां के अंदर तक का अनाज भीग गया। लोगों का कहना है कि बोरियों में भरे गेहूं में पानी लग जाने से काला पड़ा जाता है और खाने के लायक नहीं रहता है। मार्केट कमेटी विभाग और खरीद एजेंसियां भीगी बोरियांं ही गोदाम में लगवा देंगे, इससे दूसरी बोरियों का अनाज भी खराब होने की संभावना रहती है। संवाद
प्रतापनगर अनाज मंडी में भीगी गेहूं से भरी बोरियां। संवाद