यमुनानगर। इस बार ओलावृष्टि व तेज हवाओं से जिले में हजारों एकड़ गेहूं की फसल खेताें में बिछ गई है। बिछी हुई इस फसल को कंबाइन से कटवाया जाए या फिर मजदूरों से, किसान इस दुविधा में पड़ गए हैं। क्योंकि कंबाइन खेत में बिछी हुई फसल को ठीक से काट नहीं पाएगी। यदि कटवाते भी हैं तो काफी फसल खेत में ही रह जाएगी जिससे उन्हें नुकसान होगा। वहीं हाथ से कटवाने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे। यदि मजदूर गेहूं काटने के लिए हामी भर रहे हैं तो वह रुपये बहुत ज्यादा मांग रहे हैं। विदित हो कि जिले में इस बार 88 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई की गई थी।
गत वर्ष गेहूं काटने के लिए कंबाइन संचालकों ने 1500 रुपये प्रति एकड़ की दर से राशि ली थी। फिलहाल जिले में गेहूं की कटाई पूरी तरह से शुरू नहीं हुई है। ऐसे में इस बार भी कंबाइन का रेट 1500 रुपये ही रहेगा या फिर इसमें 200 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं जो गेहूं खेतों में बिछी हुई है, उसे काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे। मजदूराें का कहना है कि खेत में बिछ चुकी फसल को हाथ से काटने में काफी परेशानी होती है। इससे उनका समय भी बर्बाद होता है। इसलिए मजदूर इस बार प्रति एकड़ कटाई के लिए दो क्विंटल या फिर इससे अधिक गेहूं की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा डेढ़ से दो क्विंटल गेहूं की मांग गेहूं निकालने के लिए थ्रेशर संचालक कर रहे हैं।
बारिश दो बार पहुंचा चुकी है नुकसान
इस बार फरवरी व मार्च में ओलावृष्टि के साथ-साथ बारिश दो बार गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा चुकी है। फरवरी माह में ही 73179 एकड़ गेहूं की फसल बारिश से प्रभावित हुई थी। इससे ज्यादा नुकसान मार्च महीने में हुआ था। बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई। कई जगह तो गेहूं की फसल काली पड़ने लगी है। सबसे ज्यादा नुकसान खंड प्रतापनगर, छछरौली व बिलासपुर क्षेत्र में हुआ है।
कई साल से मजदूर नहीं मिल रहे
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के जिला प्रधान संजू गुंदियाना, निदेशक मंदीप सिंह रोड छप्पर, भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रामबीर सिंह चौहान का कहना है कि इस बार बारिश व ओलावृष्टि ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। गेहूं काटने के लिए तो मजदूर गांवों में मिल ही नहीं रहे। कई साल से यही समस्या है। यदि मजदूर फसल काटने को तैयार होता है तो वह गेहूं बहुत ज्यादा मांग रहे हैं। वरना किसान भी चाहता है कि गांव के लोगों को रोजगार मिले।