प्रतापनगर। हथिनीकुंड बैराज पर यमुना नदी का जलस्तर लगातार घटने से पश्चिमी यमुना नहर पर स्थापित ताजेवाला भूड़कलां, बेगमपुर और नैनावाली में चार पन बिजली परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इन परियोजनाओं को सामान्य रूप से संचालित करने के लिए 5400 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान में करीब 1500 क्यूसेक पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है।
इससे बिजली उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है और इकाइयों को शिफ्ट में चलाने की नौबत आ गई है। हथिनीकुंड बैराज बनने के बाद 18 अप्रैल 2021 को यमुना नदी का सबसे कम जलस्तर 887 क्यूसेक दर्ज किया गया था, जिसमें से दिल्ली को केवल 535 क्यूसेक पानी ही मिल पाया था, जबकि उसकी मांग 761 क्यूसेक थी।
हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा संचालित इन परियोजनाओं की कुल उत्पादन क्षमता 62.7 मेगावाट है। ताजेवाला, नैनावाली, भूड़कलां और बेगमपुर स्थित इन चार इकाइयों में प्रत्येक पर दो-दो मशीनें लगी हैं। यदि 5400 क्यूसेक पानी उपलब्ध हो तो ये इकाइयां 24 घंटे में 10 से 12 लाख यूनिट बिजली उत्पादन करने की क्षमता रखती हैं।
पानी की कमी के कारण उत्पादन घटकर काफी कम रह गया है। वीरवार को तो पानी की कमी के चलते एक इकाई को पूरी तरह बंद रखना पड़ा, जबकि अन्य इकाइयों को भी पानी की उपलब्धता के अनुसार ही चलाया जा रहा है। जलस्तर में गिरावट का सीधा संबंध मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों से है।
यमुना नदी का जलस्तर मुख्य रूप से बारिश और पहाड़ों पर जमी बर्फ के पिघलने पर निर्भर करता है। जनवरी और फरवरी में यह स्तर सामान्यतः 3000 से 4000 क्यूसेक के बीच रहता है, लेकिन अप्रैल में इसमें काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। 24 घंटे के औसतन जल प्रवाह की बात करें तो एक अप्रैल को 3749 क्यूसेक, पांच अप्रैल को 3325 क्यूसेक, 10 अप्रैल को 6499 क्यूसेक, 15 अप्रैल को 3963 क्यूसेक, 23 अप्रैल को 3314 क्यूसेक, 27 अप्रैल को 4330 क्यूसेक और 30 अप्रैल को 4466 क्यूसेक जलस्तर दर्ज किया गया। संवाद
वीरवार सुबह बढ़ा और शाम को घटा जलस्तर
वीरवार सुबह पांच बजे बैराज पर यमुना नदी का अधिकतम जलस्तर 5740 क्यूसेक और शाम चार बजे न्यूनतम 1976 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया। इस पानी में से सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सबसे पहले 352 क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया, ताकि जलीय जीवों का जीवन सुरक्षित रह सके और नदी को भी सूखने से बचाया जा सके। इसके बाद दिल्ली की जरूरत को देखते हुए पानी दिया जाता है। वर्तमान में दिल्ली से 761 क्यूसेक पानी की मांग आ रही है। शेष बचे पानी में से 66 प्रतिशत हरियाणा और 33 प्रतिशत उत्तर प्रदेश को दिया जाता है। शाम को 1976 क्यूसेक में से पश्चिमी यमुना नहर में 1525 क्यूसेक और उत्तर प्रदेश की पूर्वी यमुना नहर में 99 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पश्चिमी यमुना नहर के जरिए करनाल के मूनक हेड से दिल्ली को पानी आपूर्ति की जाती है।
बैराज पर पानी का स्तर घटने का असर पन बिजली इकाई पर पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यमुना नदी व दिल्ली को पर्याप्त पानी दिया जा रहा है। तापमान बढ़ने से पहाड़ों पर जमी बर्फ पिंघलेगी तो जलस्तर में भी बढ़ोतरी होगी। - शेर सिंह, सीनियर गेज रीडर, हथिनीकुंड बैराज।