यमुनानगर। अपने हाथों में जो कागज लेकर ये लोग खड़े हैं वह कोई सामान्य दस्तावेज नहीं, बल्कि निगम की ओर से दी गई प्लॉटों की रजिस्ट्रियां हैं। इसे लेकर गधौली का माजरा गांव के 35 परिवार तीन साल से भटक रहे हैं, लेकिन प्लॉट कहां हैं, इसके बारे में न तो इन लोगों को पता है और न ही अधिकारियों को।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बीपीएल परिवारों को 100-100 वर्ग गज के प्लॉट मुफ्त देने की घोषणा की थी। योजना के तहत ग्राम पंचायत गधौली का माजरा के बीपीएल परिवारों का भी चयन किया गया था। वहीं मार्च 2010 में नगर निगम यमुनानगर का गठन करते हुए शहर से लगते 42 गांवों को इसमें शामिल कर लिया गया। इसमें गधौली का माजरा गांव भी शामिल था। नगर निगम बनने के चार साल बाद पहला चुनाव हुआ। ऐसे में जिन लोगों को प्लॉट मिलने थे वह काम बीच में ही लटक गया। लोगों ने भागदौड़ की तो निगम अधिकारियों ने पात्रों को आवंटन पत्र जारी करते हुए अगस्त-2019 में प्लॉटों की रजिस्ट्रियां करवा दी। फिर भी काफी लोग ऐसे रह गए जिनकी रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
गधौली का माजरा निवासी सरदारी लाल, राजबीर सिंह, विक्की, खरैती लाल, मांगा राम, अशोक कुमार, बलदेव, चांदराम, कैलाश चंद, नेकी राम ने बताया कि जिन लोगों को रजिस्ट्री मिल चुकी है, उन्हें आज तक यह नहीं पता चल पाया कि उनका प्लॉट कहां पर है। इससे रजिस्ट्री एक कागज का टुकड़ा बनकर रह गई है। प्लॉट न होने से वह न तो घर बना पा रहे हैं और न ही उसमें कोई काम कर सकते हैं। अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं। कुछ लोग तो ऐसे हैं जिनके नाम पर प्लॉट अलॉट हुआ था और उनकी मौत भी हो गई है। अब उनका इंतकाल कराना है, लेकिन बिना प्लॉट इंतकाल किसका करवाएं। मेयर द्वारा लगाए गए जनता दरबार में भी उन्होंने शिकायत दी लेकिन कोई आश्वासन तक नहीं मिला।
एक सप्ताह में समाधान की है उम्मीद : संजीव कुमार
नगर निगम वार्ड 12 के पार्षद संजीव कुमार ने बताया कि गधौली का माजरा के लोगों ने रजिस्ट्री होने के बावजूद प्लॉट नहीं मिलने की शिकायत दी है। लोगों की समस्या जायज है। नगर निगम कमिश्नर ने अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी है। उम्मीद है एक सप्ताह में इसका समाधान हो जाएगा।
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डीडीपीओ से रिकॉर्ड मांगा है : अशोक कुमार
नगर निगम के डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर अशोक कुमार ने बताया कि गधौली का माजरा के लोगों को प्लॉट की रजिस्ट्री नगर निगम ने नहीं बल्कि तब ग्राम पंचायत ने दी होगी। प्लॉट 2010 से पहले लोगों को आवंटित हुए थे। इस बारे में डीडीपीओ से रिकॉर्ड मांगा गया है।