संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। डीसी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2013 में पहली बार नोटा का विकल्प मतदाताओं को प्रदान किया था। इसका उद्देश्य यह था कि कई बार मतदाता इसलिए वोट डालने नहीं जाते थे कि उनको कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं होता और बिना वोट दिए घर पर बैठे रहते थे।
निर्वाचन आयोग ने अब हर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में नोटा का बटन ईवीएम में अनिवार्य कर दिया है। उदाहरण के तौर पर अंबाला लोकसभा क्षेत्र से इस बार 15 उम्मीदवार हैं। जिनमें से सर्वाधिक वोट प्राप्त करने वाले प्रत्याशी को विजयी घोषित किया जाएगा। किसी वोटर को इनमें से कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो वह नोटा का बटन दबाकर अपने वोट का प्रयोग कर सकता है।
डीसी ने कहा कि हर एक मतदाता को अपने वोट के अधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। चुनाव में नोटा सहित कुल 15 प्रत्याशी होंगे और इनके लिए एक-एक बैलेट मशीन का प्रयोग प्रत्येक बूथ पर किया जाएगा। मतदाता इनमें से किसी भी उम्मीदवार को चुन सकता है, जिनमें नोटा का बटन भी शामिल है। नोटा के मतों की भी एक उम्मीदवार के मतों की तरह गणना की जाती है और उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है।