कोरोना संक्रमण से जंग जारी है। जिले में कोरोना केसों को देखते हुए ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, बेड और आइसोलेशन वार्डों की संख्या बढ़ाई जा रही है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब आइसोलेशन वार्ड खोलने की तैयारी चल रही है। जिले के अस्पतालों और कोविड सेंटरों में कुल 996 बेड हैं, जिनमें बिना ऑक्सीजन के बेड 331, आईसीयू बेड 148 और वेंटिलेटर की कुल संख्या 30 है। शुक्रवार रात आठ बजे तक कुल 382 बेड उपलब्ध थे, जिनमें ऑक्सीजन सहित 127, बिना ऑक्सीजन के बेड 222, आईसीयू 33 व वेंटिलेटर दो खाली थे। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले में फिलहाल ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और दवाइयों की स्थिति अच्छी है। लेकिन आबादी के लिहाज से देखें तो ये स्वास्थ्य सेवाएं नाकाफी हैं। जिस वजह से संक्रमित मरीजों को विभिन्न परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो न वेंटिलेटर है और न ही आईसीयू की सुविधा। जबकि ग्रामीण अंचलों में हालात बिगड़ने शुरू हो गए हैं।
शहरी क्षेत्रों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा होने का बड़ा कारण ग्रामीण संक्रमित मरीजों को भी यहां भर्ती किया जा रहा है। ऐसे में थोड़ी व्यवस्थाएं गड़बड़ाई हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते केसों को देखते हुए यहां पर 30 गांवों में आइसोलेशन सेंटर बनाए जा रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बेड खाली हैं, लेकिन वहां पर उतनी सुविधाएं नहीं हैं। कहीं पर वेंटिलेटर नहीं है, तो कहीं पर आईसीयू की व्यवस्था नहीं है। जिस वजह से अधिकतर मरीज निजी अस्पताल में ही भर्ती हो रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने अस्पतालों में बेडों की संख्या बढ़ाई है। सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी अस्पतालों में बेड बढ़ाए गए हैं। अब जिले में बेड की संख्या एक हजार तक पहुंच गई है। फिलहाल जिले में व्यवस्था ठीक है, लेकिन इसी तरह से केस बढ़ते रहे, तो व्यवस्था चरमरा सकती है। जिले में मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए विभिन्न पार्टियों के पदाधिकारी भी सामने आने लगे हैं।
यहां बढ़ाई बेड की संख्या
सिविल अस्पताल में 11 से बढ़ाकर 27 बेड कर दिए हैं, जबकि गाबा अस्पताल में 50 से 100, वरयाम सिंह अस्पताल में 25 से 40, बालाजी अस्पताल में आठ, शर्मा अस्पताल में 12 बेड, तेजली स्टेडियम में 25 बेड बढ़ाए गए हैं। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी बेड की संख्या बढ़ाई गई है। करीब 200 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है। अब श्रीलेखराज मल्टी स्पेशलिटी जनरल अस्पताल गधौली में भी शुरू हो गया है। यह भी सरकार के पोर्टल पर आ गया है। यहां पर 150 बेड की व्यवस्था है।
ऑक्सीजन से भी है राहत
पिछले साल सितंबर माह में कोरोना के केस बढ़ने के कारण ऑक्सीजन की डिमांड भी बढ़ गई थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने ऑक्सीजन की डिमांड को कंट्रोल करने के लिए ईएसआई कोविड-19 अस्पताल में 1000 लीटर का सिलिंडर स्थापित कराया था। इसके बाद एक डिमांड और बढ़ी तो यमुना प्लांट में खुलवाया गया। इस कारण जिले में ऑक्सीजन की स्थिति समस्या नहीं है। अभी यमुनानगर और जगाधरी के सिविल अस्पताल में दो नए ऑक्सीजन प्लांट भी लगाए जाने हैं।
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जिले में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और दवाइयां पर्याप्त मात्रा में है। कोरोना मरीजों को कोई परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना बेकाबू होने की आशंका के मद्देनजर ग्रामीण क्षेत्रों में आइसोलेशन सेंटर बनाए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों का इलाज वहीं पर हो सके। ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की संख्या बढ़ते देखते हुए हाई रिस्क गांवों को चिह्नित किया गया है। यदि मरीजों की संख्या और बढ़ती है तो नगर निगम की ओर से धर्मशालाओं को भी चिह्नित किया गया है। जरूरत पड़ने पर इन्हें भी कोविड सेंटरों में तब्दील कर दिया जाएगा। लगभग 30 गांवों में आइसोलेशन वार्ड बनाए जाएंगे।
-डॉ. विजय दहिया, सिविल सर्जन।