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कम पड़ गईं प्रशासन की गाड़ियां

Wed, 06 Aug 2014 12:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर
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प्रशासन की शेम-शेम, प्रशासन की शेम-शेम। करीब दस मिनट तक सैकड़ों कर्मचारियों द्वारा एक स्वर में लगाए इस नारे से लघु सचिवालय गूंजता रहा।
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दरअसल, मंगलवार को सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले विभिन्न विभागों के सैकड़ों कर्मचारी शामिल होकर जेल भरो आंदोलन में गिरफ्तारियां देने पहुंचे थे।

 जिनकी गिरफ्तारी के लिए प्रशासन की ओर से दो गाड़ियां मौके पर बुलवाई गईं, लेकिन कर्मचारियों की संख्या के आगे दो गाड़ियां पर्याप्त न रहीं। उन्हें दोनों गाड़ियों में ही खडे़ होकर चलने के लिए कहा गया, इस पर कर्मचारी भड़क गए व और गाड़ियों को बुलाने की मांग पर अड़ गए।

देखते ही देखते कर्मियों ने प्रशासन की शेम-शेम के नारे लगाने शुरू कर दिए। गाड़ियों के न आने तक लघु सचिवालय गेट पर जुटकर परिसर में कर्मचारियों से भरी खड़ी दोनों गाड़ियों को भी बाहर जाने नहीं दिया।
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करीब घंटे भर बाद प्रशासन द्वारा मौके पर चार और गाड़ियों को बुलवाकर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियां की गई, बावजूद इसके कुछ कर्मचारी छूट गए।

राष्ट्रीय राजमार्ग से जुलूस निकाल पहुंचे लघु सचिवालय
सर्व कर्मचारी संघ के आह्वान पर जेल भरो आंदोलन के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मंगलवार को विभिन्न विभागों के सैकड़ों कर्मचारी कन्हैया साहिब चौक पर एकत्रित हुए।

यहां से कर्मचारी सर्व कर्मचारी संघ सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के बैनर हाथ में लेकर जुलूस की शक्ल में एनएच-73 से लघु सचिवालय पहुंचे।

जहां परिसर में खड़े होकर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष व्यक्त किया। इस दौरान आंदोलन की अध्यक्षता कर रहे सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान श्याम लाल नरवाल ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार कई वर्षों से कर्मचारियों की मांगों को अनदेखा कर रही है।

कई बार सरकार ने बातचीत में मांगों पर सहमति भी जताई, लेकिन उनको लागू नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि कर्मचारी काफी लंबे समय से दो वर्ष पूर्ण होने पर सभी कर्मचारियों को पक्का करने, पंजाब के समान वेतन, केंद्र के समान वेतन भत्ते, कैशलेस मेडिकल सुविधा, निजीकरण व ठेकाप्रथा बंद करने, अतिथि अध्यापकों को पक्का करने जैसी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

इसको लेकर विरोध स्वरूप कर्मचारियों द्वारा धरने, प्रदर्शन और हड़तालें की जा चुकी हैं, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। जेल भरो आंदोलन के बाद भी यदि सरकार ने मांगें नहीं मानी, तो मजबूरन कर्मचारियों को दोबारा हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

इस मौके पर जोत सिंह, परवेश पारोचा, मांगेराम, राज कुमार, रजनीश शर्मा, वीरेंद्र राणा, महीपाल सौदे, हरिओम कश्यप, राजबीर, रोशन लाल, रत्नसिंह कलानौर, राम कुमार, सोमपाल राणा, मीनाक्षी शर्मा और अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।

कर्मचारियों के आंदोलन के लिए प्रशासन नहीं था तैयार
सर्व कर्मचारी संघ द्वारा 20 जुलाई की रोहतक रैली में ही पांच अगस्त को जेल भरो आंदोलन करने की घोषणा कर दी गई थी। जिसके बाद से लगातार संघ और विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा कर्मचारियों से आंदोलन के तहत जेल भरो आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया जा रहा था।

काफी समय पहले ही आंदोलन की घोषणा के बाद भी मंगलवार को कर्मचारियों की गिरफ्तारी को लेकर प्रशासन तैयार नहीं दिखा और इसमें जुटने वाले कर्मचारियों की संख्या का अनुमान न लगा सका।

इसी कारण प्रशासन की ओर से लघु सचिवालय में पुलिस बल सहित केवल एक ही गाड़ी बुलाई गई, जबकि गिरफ्तारियां देने 300 से अधिक कर्मचारी पहुंच गए।

आनन-फानन में प्रशासन की तरफ से एक गाड़ी और बुला ली गई, उनमें कर्मचारियों को बैठाने के बाद आधे से ज्यादा कर्मचारी नीचे ही छूट गए। जिन्हें पहले उन्हीं दोनों गाड़ियों में बैठाने का प्रयास किया गया, लेकिन कर्मचारियों ने खड़े होकर चलने से मना कर दिया और दूसरी गाड़ियों को बुलाने की मांग पर अड़ गए।

सुलगती रही बिड़ी, उड़ता रहा कानून
जिस वक्त लघु सचिवालय में सर्व कर्मचारी संघ का जेल भरो आंदोलन चल रहा था, उस दौरान प्रशासन की नाक तले सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान की पाबंदी का कानून टूटता दिखाई दिया।
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जहां ठीक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने कई व्यक्ति बीड़ी सुलगाते तो कई धुएं के छल्ले बनाते नजर आए, लेकिन उन्हें रोकने की जहमत किसी ने नहीं की। 
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