संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। बारिश व ओलावृष्टि से खराब फसलों का मुआवजा भुगतान के लिए जल्द सर्वे करने में देरी से होने से किसान अगली फसल की बिजाई भी नहीं कर पाएंगे। यह चिंता कस्बे के सब्जी उत्पादक किसानों ने जताई है।
पूर्व सरपंच राजकुमार राणा, नवनीत राणा, बलबीर राणा व राजेश राणा ने बताया कि एक फरवरी को ओलावृष्टि से टमाटर, गोभी, शिमला मिर्च की फसल नष्ट होने से केवल कस्बे के नहीं सब्जी उत्पादकों को दो करोड़ से अधिक की लागत का नुक्सान हुआ है। किसानों की मेहनत का तो कोई आकलन ही नहीं किया जाता है।
पार्षद व सब्जी उत्पादक किसान अंकुश राणा ने बताया कि कस्बे में किसानों के पास कम जमीन होने के कारण सब्जी पैदा करके अपना गुजारा करते हैं। कुछ किसान तो ठेके पर जमीन लेकर गुजर बसर करते हैं। नुकसान सहने के बावजूद किसान अपने खेतों में अगली फसल बोने की तैयारी कर रहे हैं। जब तक नुकसान के आकलन के लिए सर्वे न हो जाए, तब तक किसान अगली फसल की बोआई नहीं कर पाएंगे।
मांग है कि सर्वे का काम जल्दी निपटाया जाए। अंकुश राणा ने बताया कि ओलावृष्टि से सब्जी की फसलों के अलावा अगली फसल की बिजाई के लिए तैयार पनीरी भी कतई नष्ट होने से किसान अगली फसल की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। दूसरे शहरों से दोगुने दामों पर पनीरी खरीदने से किसानों की लागत भी बढ़ जाएगी।
वहीं जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष व किसान नेता अनिल संधू ने पटवारियों की हड़ताल के कारण भी विशेष गिरदावरी के काम में देरी होने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि गेहूं, सरसों व पशु चारे की फसलें नष्ट होने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। उनकी मांग है कि सरकार पटवारियों की हड़ताल का जल्दी समाधान करके विशेष गिरदावरी तुरंत करवाने का प्रबंध करें। इसके अलावा पहले की तरह देरी से मुआवजा देने की बजाए तुरंत प्रभाव से समुचित मुआवजा देकर किसानों को राहत प्रदान की जानी चाहिए।