संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 55वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि एक बार भगवान महावीर स्वामी से पूछा गया कि प्रभु व्यक्ति का मूर्ख होना अच्छा है या बुद्धिमान होना अच्छा है? प्रभु महावीर ने कहा कि किसी व्यक्ति का मूर्ख होना अच्छा है तो किसी व्यक्ति का बुद्धिमान होना अच्छा है।
इस पर पूछा गया प्रभु आजकल तो बुद्धिमानों का जमाना है। मूर्ख और भोले व्यक्तियों को हर कोई दबाना चाहता है फिर मूर्ख होना अच्छा कैसे? प्रभु ने कहा जो व्यक्ति पाप करते हैं, ठगी करते हैं, लूटते हैं, दूसरों को भी पाप की प्रेरणा देते हैं उनका मूर्ख होना अच्छा है, ताकि वे न स्वयं पाप करें न दूसरों को पाप करने दें। जो व्यक्ति धर्म करते हैं, पुण्य करते हैं और किसी का भला करते हैं उन व्यक्तियों का बुद्धिमान होना अच्छा है।
साध्वी ने कहा कि हमें अपनी बुद्धि का प्रयोग सदा पुण्य कार्य, धर्म, ध्यान व किसी का भला करने में करना चाहिए। ऐसी बुद्धि व ऐसा बुद्धिमान होना किसी काम का नहीं जो दूसरों का नुकसान करने में लगा रहे। साध्वी ने बुद्धिमान होने के फायदे बताएं। उन्होेंने कहा कि बुद्धिमान लोग समस्याओं का समाधान निकालने में सक्षम होते हैं। वह निर्णय लेने में सहायता करते हैं। बुद्धिमान लोगों में आत्मविश्वास होता है।