संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दुसानी गांव में पकड़े गए यूरिया के अवैध गोदाम ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पता नहीं कितने अधिकारी आए और यूरिया तस्करी पर लगाम लगाने के दावे करते रहे, लेकिन आज तक कोई भी इसमें सफल नहीं हो पाया। वह इसलिए कि यूरिया तस्करी के काले कारोबार की जड़ें काफी गहरी हैं।
पहले तो कृषि ग्रेड यूरिया को तकनीकी ग्रेड यूरिया के कट्टों में ही सप्लाई किया जाता था। अब दुसानी गांव में गोदाम से मिले नमक के खाली व नए कट्टों ने खुद अधिकारियों को भी हैरानी में डाल दिया है। नमक के कट्टों में तस्करी इसलिए की जाने लगी ताकि अधिकारियों की नजरों से बचा जा सके। यदि कोई पकड़ भी ले तो यही समझे की कट्टों में यूरिया नहीं बल्कि नमक भरा हुआ है। गोदाम से स्पेशल श्याम नाम ब्रांड वाले नमक के 500 कट्टे मिले हैं।
दरअसल यमुनानगर प्लाईवुड का हब है। फैक्ट्रियाें में प्लाईबोर्ड को चिपकाने के लिए ग्लू का इस्तेमाल होता है। यह ग्लू यूरिया खाद से बनता है। यूरिया दो प्रकार का होता है। एक कृषि ग्रेड यूरिया जिसे केवल फसल में डाला जा सकता है। दूसरा तकनीकी ग्रेड यूरिया है जो केवल ग्लू बनाने के ही काम आता है। कृषि ग्रेड यूरिया पर सरकार सब्सिडी देती है, जिसके बाद एक कट्टा 264 रुपये का किसान को मिलता है।
वहीं तकनीकी ग्रेड यूरिया पर सब्सिडी नहीं मिलती। इसका कट्टा 2400 रुपये का मिलता है। तस्करी रोकने के लिए सरकार ने कुछ साल पहले डीलरों के माध्यम से बिकने वाले कृषि ग्रेड यूरिया पर रोक लगा दी थी। केवल सरकारी केंद्रों के माध्यम से किसानों को यूरिया दिया जाता था। तस्करी रोकने के लिए यूरिया में नीम कोटिंग की जाने लगी। इसके बावजूद तस्करी नहीं रुक रही। तस्कर तकनीकी ग्रेड यूरिया के बैग में कृषि ग्रेड यूरिया को सप्लाई किया जा रहा है।
जिले में हर साल करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन यूरिया कृषि कार्यों में इस्तेमाल होता है। यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल गेहूं, धान व गन्ने की फसल में होता है। परंतु कृषि योग्य यूरिया की फैक्टरियों में तस्करी होने से किसानों को काफी परेशानी होती है। पिछले साल तो किसानों ने यूरिया किल्लत को लेकर गांव खजूरी स्थित पैक्स केंद्र पर ताला लगा दिया था।
इसके अलावा अन्य पैक्स केंद्रों पर भी लंबी लाइन देखने को मिली। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने बताया कि जब भी किसी फसल की बिजाई करते हैं तो किसान को उसमें डालने के लिए पर्याप्त यूरिया नहीं मिलता। किसान के हिस्से का यूरिया फैक्टरियों में जा रहा है।
यूरिया तस्करी में अधिकारी भी शामिल
यूरिया तस्करों का साथ देने वालों में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के कई अधिकारियों का भी नाम सामने आ चुका है। इसी साल फरवरी माह में कृषि विभाग के गुणवत्ता नियंत्रक बलबीर सिंह भान पर पुलिस ने यूरिया तस्करों से मिले होने का केस दर्ज किया था। मानकपुर औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री में यूरिया खाद की तस्करी के मामले बलबीर सिंह की मिलीभगत सामने आई थी।जुलाई माह में कृषि विभाग के तत्कालीन उपनिदेशक आत्मा राम गोदारा का नाम भी सामने आया। आत्मा राम गोदारा का नाम कार्यालय में सीएम फ्लाइंग की दबिश के बाद सामने आया। सीएम फ्लाइंग ने खुलासा किया था कि तस्करी में पकड़े गए यूरिया के सैंपल गलत लैब में भेजे गए। इससे सैंपल की जांच नहीं हो सकी। वहीं दो साल पहले टेक्निकल ग्रेड यूरिया के सैंपल लगातार फेल आने व जीएसटी चोरी होने पर यमुनानगर के तत्कालीन उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सैनी, एसडीओ सतबीर लोहिया व गुणवत्ता नियंत्रक बालमुकंद पर गाज गिरी थी। तीनों अधिकारियों का तबादला एक साथ हुआ था। तब यूरिया की बिक्री के मुकाबले जीएसटी की वसूली कम हो रही थी।
दोनों आरोपी पकड़ से बाहर
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग जगाधरी के एसडीओ अजय कुमार की शिकायत पर थाना सदर यमुनानगर पुलिस ने दुसानी के मैसर्स सिंह फर्टिलाइजर कंपनी के प्रोपराइटर मोनू चौहान व गोदाम के मालिक विरेंद्र सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया था। पुलिस अभी तक दोनों आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। विरेंद्र सिंह विभाग की टीम को चकमा देकर निकल गया था। थाना सदर यमुनानगर के एसएचओ केवल सिंह का कहना है कि यूरिया तस्करी में आरोपी मोनू चौहान व विरेंद्र सिंह की तलाश की जा रही है। उनकी गिरफ्तार होने पर ही कोई खुलासा हो सकेगा। मामले की जांच की जा रही है।