यमुनानगर। कृषि एवं कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. प्रदीप मिल ने 10 जनवरी को खुद फैक्टरियों में जाकर यूरिया की जांच करते हुए सैंपल लिए थे। इन सैंपल को जांच के लिए केंद्रीय लैब फरीदाबाद में भेजा गया था। परंतु लैब से सभी सैंपल वापस भेज दिया गए हैं। केंद्रीय लैब से सैंपल की जांच राज्य की लैब करनाल में कराने की सलाह दी गई है। अब कृषि विभाग की तरफ से सभी सैंपल को जांच के लिए करनाल लैब में भेजा जाएगा।
आमतौर पर कृषि विभाग द्वारा फैक्टरियों व गोदामों से लिए गए यूरिया के सैंपल को करनाल स्थित स्टेट की लैब में ही भेजा जाता है परंतु इस बार सैंपल को फरीदाबाद में केंद्रीय लैब में भेज दिया गया था।
जिले में कृषि योग्य यूरिया की तस्करी की लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए कृषि विभाग के मुख्यालय से संयुक्त निदेशक डॉ. प्रदीप मील के नेतृत्व में आई टीम ने 10 जनवरी को उप निदेशक आत्मा राम गोदारा के साथ प्लाईवुड फैक्टरियों व दुकानों पर दबिश दी थी। उस दौरान टीम अंसार केमिकल एंड अलाइड प्रोडक्ट बूड़िया रोड जगाधरी पहुंची थी। यह टेक्निकल ग्रेड यूरिया का डीलर है। जहां कार्रवाई करते हुए विभाग ने टेक्निकल ग्रेड यूरिया का सैंपल लिया। इसके बाद गर्ग प्लाईवुड इंडस्ट्री अमादलपुर रोड से टेक्निकल ग्रेड यूरिया के सैंपल लिए थे। वहीं यूनाइटेड प्लाईवुड साबापुर रोड व गोल्ड लेमिनेट अमादलपुर रोड में टेक्निकल यूरिया की जांच की थी।
ग्लू बनाने में करते हैं यूरिया का प्रयोग
दरअसल पहले प्लाईवुड फैक्टरियों में कृषि कार्यों में प्रयोग होने वाले यूरिया की तस्करी होती थी। कृषि योग्य यूरिया का रेट काफी कम है। इसलिए फैक्टरियों में इसका इस्तेमाल ग्लू बनाने के लिए किया जाता है। कृषि विभाग के अलावा सीएम फ्लाइंग की टीम भी लगातार यूरिया की तस्करी को रोकने के लिए फैक्टरियों में कार्रवाई करती रहती है। अब यूरिया की तस्करी का नया तरीका डीलरों ने खोज लिया है। कोई पकड़ न ले इसके लिए कृषि योग्य यूरिया को टेक्निकल ग्रेड यूरिया के बैग में सील कर फैक्टरियों में तस्करी किया जा रहा है।
वर्जन
कृषि विभाग के उप निदेशक आत्मा राम गोदारा ने बताया कि फरीदाबाद में केंद्रीय लैब से सैंपल वापस आ गए हैं। फिलहाल सैंपल को जल्द ही करनाल लैब में भेजा जाएगा।