संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। छलौर गांव के प्राचीन शिव मंदिर में स्वामी संतोषानंद सरस्वती महाराज एवं समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार रात समापन हो गया। अंतिम दिन कथा व्यास स्वामी अनंत गिरी महाराज ने श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह एवं सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
अनंत गिरी ने कहा कि रुक्मणि देवी भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त थीं। उन्होंने मन, वचन और कर्म से श्रीकृष्ण को ही अपना पति स्वीकार किया था। जब उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया गया, तब रुक्मणि ने भगवान श्रीकृष्ण को पत्र भेज कर सहायता की प्रार्थना की। भक्त की पुकार को सुनते हुए भगवान स्वयं आए और रुक्मणि का हरण कर उनसे विवाह किया।
उन्होंने कहा कि यह प्रसंग इस बात का प्रतीक है कि सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास से भगवान स्वयं भक्त की रक्षा के लिए आते हैं।अनंत गिरी ने सुदामा चरित्र का अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता गुरु आश्रम से प्रारंभ होकर जीवन भर अटूट बनी रही। अत्यंत निर्धन अवस्था में जब सुदामा अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे, तो भगवान ने उन्हें बड़े प्रेम और सम्मान के साथ गले लगाया।
सुदामा द्वारा लाई गई थोड़ी सी चिवड़ा को भगवान ने बड़े आनंद से ग्रहण किया और बिना कुछ मांगे ही सुदामा की दरिद्रता को दूर कर दिया। इस प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि ईश्वर सच्चे प्रेम, निष्काम भक्ति और विनम्रता से प्रसन्न होते हैं। इस मौके पर शिव दत्त कांबोज, रविंद्र कश्यप, मदन पाल, मांगे राम, शिवकुमार, राजकुमार कांबोज मौजूद रहे।
छलौर गांव में कथा सुनने के लिए पहुंचे श्रद्धालु। स्वयं