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यूपी से सरगना इंतजार चला रहा नकली नोटों का काला धंधा

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नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किए गए आरोपियों को कोर्ट में पेश करने ले जाती पुलिस। फाइल फोटो - फोटो : YAMUNA NAGAR
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100-100 रुपये के नकली नोट सप्लाई करने वाला इंटरस्टेट रैकेट का मास्टर माइंड यूपी में बैठकर अपना धंधा चलाता है। वहीं से नकली नोटों की सप्लाई यमुनानगर की जाती है। जिले में हमीदा क्षेत्र को नकली नोटों के लेनदेन का सेंटर बना रखा था। यमुनानगर क्षेत्र का हैंडलर और पकड़े गए दोनों आरोपी भी हमीदा के ही रहने वाले है। हमीदा से इन नोटों की सप्लाई ठेकेदार द्वारा फैक्टरी के मजदूरों में की जाती थी। रैकेट के तार यूपी के अलावा दिल्ली व अन्य राज्यों से भी जुड़ने की जानकारी पुलिस को मिल रही है।
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रिमांड के दौरान पुलिस को काफी अहम जानकारियां हाथ लगी है। जिसके आधार पर पुलिस आगे की छानबीन कर रही है। पूछताछ में ये भी पता चला है कि पांच सौ व दो हजार के नोटों पर ज्यादा नजर रहती है। जबकि सौ रुपये का बैंगनी नोट के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। ऐसे में इस नोट को चलाने में ज्यादा आसानी है। पूछताछ में पुलिस को ये भी पता चला है कि दो साल से शहर में नकली नोट खपाएं जा रहे हैं, लेकिन सौ रुपये के नकली नोट का काम तीन चार महीने पहले ही शुरू किया गया है। हालांकि नकली नोट के मामले साल 2017 में भी सामने आ चुके हैं।
यूपी में छिपा हो सकता है सप्लायर : यूपी से लिंक जुड़े होने के कारण सप्लायर इंतजार को गिरफ्तार करने में पुलिस दूसरे दिन भी नाकाम रही। आशंका जताई जा रही है कि मुख्य सरगना इंतजार यूपी भाग गया है। जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस यूपी गई। लेकिन पुलिस उसका कोई सुराग नहीं लगा पाई। मुख्य सरगना इंतजार के साथ उसका भाई शमशेद उर्फ सोनू मीडिएटर का काम करता था। जो इंतजार व ठेकेदार अब्बास के बीच की कड़ी था। इंतजार से नकली नोट लेकर शमशेद अब्बास को देता था। जो आगे फैक्टरी में मजदूरों को सप्लाई करता था।
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यह है मामला : जठलाना के खजूरी गांव में स्थित हरिओम प्लाइवुड फैक्टरी के श्रमिक राजकुमार की परचून की दुकान पर गए। जहां राजकुमार को शक हो गया। उसने इसकी सूचना क्षेत्र में सुरक्षा एजेंट के तौर पर तैनात हेड कांस्टेबल मनीश कुमार को जानकारी दी। इन नोटों की जांच की तो पता चला ये नकली मिले। सूचना पर पुलिस ने फैक्टरी के ठेकेदार हमीदा निवासी अब्बास व उसके साथ शमशेद उर्फ सोनू का गिरफ्तार किया। आरोपियों ने पूछताछ में उनके पास से करीब तीस हजार रुपये के नकली नोट बरामद किए गए। जबकि इनके पास नकली नोट पहुंचाने वाला शमशेद का भाई इंतजार फरार था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वो तो सिर्फ सप्लायर है। उसका हैंडलर यूपी में बैठा है। जहां से इंतजार 30 हजार असली नोटों के बदले 50 हजार के नकली नोट दिए जाते हैं। वे कई महीने से इस धंधे में लगे हुए हैं।
जुलाई 2017 में भी सौ-सौ के 40 नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किए थे दो आरोपी : नौ जून 2017 की रात को भी सदर यमुनानगर पुलिस ने रायपुर के पास से गांव शादीपुर निवासी नाजिम व दौलतपुर निवासी महबूब को सौ-सौ रुपये के 40 नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। महबूब के पास से 18 नोट बरामद किए गए थे, जबकि नाजिम से 22 नोट मिले थे। पूछताछ में पता चला था कि आरोपी इन नकली नोटों को मजदूरों में चलाते थे। नकली नोट अधिकतर एक ही नंबर के थे। तब जांच में सामने आया था कि इनके तार दिल्ली से जुड़े हुए हैं। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि मजदूर तबके के पास नकली नोट चलाना बहुत आसान हैं। क्योंकि उन्हें असली नकली की ज्यादा पहचान नहीं होती। वे ये भी नहीं देखते कि उन्हें नकली नोट दिया गया है या फिर असली। दो साल बाद अब फिर ऐसा ही यह मामला सामने आया है।
नकली नोटों की सप्लाई करने वाले दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। आरोपियों से मिली जानकारी शेयर नहीं की जा सकती। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को बुधवार को फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा। जल्द ही इस मामले में बड़ा खुलासा किया जा सकता है।
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- पृथ्वी सिंह, एसएचओ, थाना जठलाना।
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