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Yamuna Nagar News: सतकुंभा धाम में श्रद्धालुओं के ठहराव के लिए बनाए दो कमरे

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संवाद न्यूज एजेंसी
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साढौरा। महादेव सतकुंभा धाम ट्रस्ट के प्रधान झंडा गांव के रमेश चंद बिट्टू ने खुद एवं दानी सज्जनों के सहयोग से श्रद्धालुओं के ठहराव एवं आराम करने के लिए दो नए कमरों का निर्माण किया है। दूरदराज से पैदल आने वाले श्रद्धालुओं को इन कमरों के बनने से थकान दूर करके राहत महसूस होगी।
शिवालिक की मनोरम पहाडिय़ों में स्थित सतकुंभा धाम का संबंध भगवान शिव, महर्षि वेद व्यास के अलावा महाभारत से भी है। धार्मिक महत्व के अलावा इस स्थल की सुंदरता को देखते हुए इसे पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। प्रधान बिट्टू ने बताया कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दानी सज्जनों के सहयोग से दो कमरों का निर्माण किया गया है।
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पहले महादेव सतकुंभा धाम जाने के लिए श्रद्धालुओं को यहां पर पक्का रास्ता न होने के कारण गांव झंडा से चार किमी. पैदल ही शिवालिक की पहाडिय़ों में स्थित पगडंडियों से होकर इस दुर्गम जगह के लिए जाना पड़ता था। इन घुमावदार पहाडिय़ों के इस अत्यंत संकरे मार्ग का अधिकतर भाग छोटे-बड़े नालों के पानी के रास्तों से होकर ही जाता था।
पहले लगभग चार किलोमीटर के थकान भरे सफर के बाद श्रद्धालु एक छोटी सी नदी के किनारे स्थित सतकुंभा पहुंचते थे। वर्तमान में महादेव सतकुंभा धाम ट्रस्ट के सदस्यों की लगन व आस्था ने इस दुर्गम रास्ते को अर्थमूविंग मशीनों से संवार कर श्रद्धालुओं को अपने वाहनों से सतकुंभा धाम तक पहुंचाने का रास्ता बना दिया है। सतकुंभा धाम में आस्था रखने वाले श्रद्धालु अब अपने वाहनों से पहुंचने लगे है।
वहां की प्राकृतिक सुंदरता एवं सप्त धातुओं के यहां पौराणिक काल से ही निरंतर बहते आने के कारण इस स्थान को सतकुंभा के नाम से जाना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु इस बावड़ी में स्नान करके इसी जगह स्थित स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन करके स्वयं को कृतार्थ समझते हैं। उन्होंने बताया कि बताया कि इस ट्रस्ट के माध्यम से मानव समाज में स्थाई मानव कल्याण, सुख, शांति, संगठन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदर्श गुणों की स्थापना के प्रयास किए जाएंगे।
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उन्होंने बताया कि सतकुंभा धाम के जीर्णोद्धार की योजना के तहत यहां दानी सज्जनों के सहयोग से साधना कक्ष, संत निवास, आचार्य निवास, अतिथि निवास, ब्रह्मविद्या साधना कक्ष, कैलाश भवन, भगवान शिव का मंदिर, भोले बाबा का धूना, माता काली का मंदिर, सत्संग भवन व पिरामिड ध्यान सेंटर का निर्माण किया जाएगा।
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