संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पड़ोसी राजू, प्रकाश, विनोद ने बताया कि पवन हर वर्ष नवरात्र पर घर में संध्या कीर्तन कराते थे। ऐसे ही दो दिन पहले शुक्रवार को भी कीर्तन कराया। इसमें माता के भजन पवन ने खुद गाए और परिवार सहित पड़ोसियों ने माता के जयकारे लगाए।
माता के भजनों पर पवन कौशिक, राजेंद्र व संजय के परिवार के सदस्य खुशी से थिरक रहे थे। एक ही परिवार के पांच लोगों के सोमवार शाम घर आए शवों को देख परिवार के अन्य सदस्य खुद को रोक नहीं पाए। पवन की मां व भाई संजय पवन, राजेंद्र व वंशिका को लिपटकर रोने लगे। इनकी चींख-पुकार सुन सगे-संबंधियों व पड़ोसियों की आंखें भी आंसुओं से नम नजर आईं।
पड़ोसी बोले - पवन का सब कुछ उजड़ गया...सिर्फ बेटा ही बचा
पड़ोसी कंचन व सुगंधिया ने बताया कि पवन, राजेंद्र व संजय के घर अलग-अलग जरूर हैं, पर तीनों भाइयों का परिवार एकजुट हमेशा नजर आया। इनके परिवार का पड़ोसियों से भी मिलनसार व्यवहार रहा। पवन की पत्नी उर्मिला व संजय की पत्नी सुमन सुबह शाम सभी को राम-राम कहती थीं। पवन व राजेंद्र की भी धार्मिक कार्यक्रमों में काफी रुचि थी। पवन कथा व्यास होने के साथ पंडताई करते थे। लोग उनके पास कथा कराने के साथ अपने दुखों के निवारण के लिए भी आते थे। उनके घर के सामने ही खाली प्लॉट है जिसमें वह समय-समय पर कथा का आयोजन करते रहते थे। हादसे में पवन के परिवार का सबकुछ उजड़ गया, चूंकि पवन, उसकी पत्नी व बेटी की मौत के बाद अब घर पर पवन का 12 साल का बेटा तन्मय ही है, जो अब दादी के पास है। राजेंद्र के पास दो बच्चे हैं।
राजिंद्र शर्मा के घर विलाप करते परिजन। संवाद
राजिंद्र शर्मा के घर विलाप करते परिजन। संवाद