यमुनानगर। मात्र ढाई किलोमीटर की सड़क न बनने से यमुना नदी पर नगली घाट में 84 करोड़ रुपये से बना पुल शोपीस बन गया है। यह पुल इसलिए बनाया गया ताकि दो राज्यों हरियाणा व उत्तर प्रदेश के बीच यमुना नदी के रूप में जो खाई है वह दूर हो सके। फिर भी पुल बनने के बावजूद दोनों राज्यों के बीच बड़ा फासला बना हुआ है। जिस पुल को दो साल पहले बनकर पूरा हो जाना चाहिए था वह इस साल भी अधूरा है। किसान व आमजन अपनी जान जोखिम में डाल कर यमुना नदी को पार कर रहे हैं।
यमुनानगर के काफी किसानों की जमीन यमुना नदी पार उत्तर प्रदेश में है। इसके अलावा लोगों को अन्य कार्यों के सिलसिले से भी उत्तर प्रदेश में आना जाना करना होता है। मजबूरन लोग यमुना नदी के बहाव को पार करके यूपी जाते थे। दिक्कत मानसून सीजन में तब बढ़ जाती थी जब यमुना नदी में उफान आता है और किसान अपने खेतों में भी नहीं जा पाते और दूसरी तरफ से फसलों को भी बेचने के लिए मंडी तक नहीं ला सकते। उन्हें मजबूरन कई किलोमीटर दूर कलानौर से होकर यमुना नदी पर बने पुल से होकर यूपी जाना पड़ता है। इसलिए जठलाना, रादौर क्षेत्र के लोगों द्वारा काफी समय से यमुना नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे थे। इस समस्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2019 में जठलाना के नगली घाट पर पुल निर्माण का काम शुरू कराया। दावा किया गया था कि पुल 30 जून 2021 तक बनकर तैयार हो जाएगा हालांकि बीच में लॉकडाउन लगने से इसके निर्माण में थोड़ी देरी हुई। लॉकडाउन व लेटलतीफी 27 करोड़ में पड़ी। क्योंकि निर्माण के समय पुल की लागत 57 करोड़ रुपये थी, जो बाद में 84 करोड़ रुपये हो गई। साथ ही पुल निर्माण की तारीख भी अप्रैल 2022 तक बढ़ा दी गई। किसान बलविंद्र, सर्वजीत सिंह, मुकेश कुमार का कहना है कि पुल को जल्द बनाया जाए ताकि वह भी अपने खेतों तक आसानी से पहुंच सकें।
नगली घाट पर यमुना नदी पर यूपी व हरियाणा के बीच बन रहे पुल की कुल लंबाई 576 मीटर है। इस पुल के नीचे कुल 17 पिल्लर हैं। जिनमें से छह पिल्लर यमुना नदी के अंदर बने हैं, जबकि 11 नदी के दोनों तरफ बने हैं। पुल के दूसरी तरफ यूपी में 1100 मीटर व हरियाणा की तरफ 1200 मीटर सड़क बनाई जानी है। जिसके लिए संधाली, नगला रांगड़ान, गुमथला, नगली व प्रहलादपुर के किसानों की करीब 61 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। बस इसी सड़क को अधिकारी अभी तक नहीं बनवा सके हैं। जब तक सड़क नहीं बनती तब तक पुल किसी काम का नहीं है। ज्ञात हो कि जमीन अधिग्रहण से लेकर सड़क और पुल निर्माण पर कुल 104 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
हरियाणा एंटी करप्शन सोसाइटी के अध्यक्ष एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि पुल को बनाने के लिए यमुना नदी की प्राकृतिक धारा को मोड़ा गया। खनन माफिया बहाव में बदलाव करके लंबे समय से आसपास से रेत निकाल रहा है। नियमों को ताक पर रख कर नदी के अंदर पोकलेन मशीन चलती है। खनन ठेकेदार पुल निर्माण में हो रही देरी का फायदा उठाकर दिनरात रेत निकाल रहे हैं। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भी लिखा है।
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन नवीन खत्री का कहना है कि यमुना नदी पर पुल बन चुका है। पुल के दोनों तरफ सड़क बननी बाकी है। मार्च 2024 तक सड़क बनाने का काम पूरा हो जाएगा।