संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से समस्त दान, व्रत, तीर्थ का पुण्य प्रदान करती है। ईश्वर से लौ लगाने का भागवत एक मात्र सरल मार्ग है। इससे मनुष्य के सभी जाने अनजाने में किए पाप कर्मों के कष्ट दूर हो जाते हैं। यह पंक्तियां आचार्य मदन शास्त्री ने भागवत कथा के दौरान कहीं।
आचार्य मदन ग्रीन पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन प्रवचन कर रहे थे। इस दौरान आचार्य मदन शास्त्री ने शुकदेव जन्म, परीक्षित श्राप और अमर कथा का वर्णन किया। कथा में गायक अनुप्रिया ने भजनों से प्रभु की महिमा का गुणगान किया।
आचार्य र्ने बताया कि देवर्षि नारद के कहने पर माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि उनके गले में जो मुंडमाला है, वह किसकी है। जिस पर भोलेनाथ ने बताया वह मुंड किसी और के नहीं बल्कि मां पार्वती की हैं। हर जन्म में मां पार्वती विभिन्न रूपों में महादेव की पत्नी के रूप में देह त्याग करतीं तो भगवान शंकर उनका मुंड गले में धारण कर लेते। पार्वती ने हंसते कहा हर जन्म में क्या मैं ही मरती रही, परंतु आप नहीं।
भगवान शंकर ने कहा हमने अमर कथा सुन है। जिस पर मां पार्वती ने कहा मुझे भी वह अमर कथा सुनाइएं। जिस पर भगवान शंकर मां पार्वती को अमर कथा सुनाने लगे। शिव-पार्वती के अलावा सिर्फ एक तोते का अंडा था जो कथा के प्रभाव से फूट गया। उसमें से सुखदेव जी का प्राकट्य हुआ। कथा सुनते सुनते मां पार्वती सो गई और वह कथा सुखदेव ने सुनी और अमर हो गए।
भगवान शंकर सुखदेव के पीछे उन्हें मृत्युदंड देने के लिए दौड़े। सुखदेव जी भागते भागते व्यास जी के आश्रम पहुंचे और उनकी पत्नी के मुंह से गर्भ में प्रविष्ट हो गए। 12 वर्ष बाद सुखदेव जी गर्भ से बाहर आए, इस तरह श्री सुखदेव जी का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि कथा सुनना समस्त दान, व्रत, तीर्थ, पुण्यादि कर्मों से बढ़कर है। कथा सुनकर पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।