संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। पंजाबी धर्मशाला में सोमवार को अमर बलिदानी मदनलाल ढींगड़ा का बलिदान दिवस मनाया गया। समाज के लोगों ने मदनलाल ढींगड़ा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि भेंट की।
इस अवसर पर सुशील बत्रा, कृष्ण मक्कड़ व अमित कांबोज ने बताया कि अमर बलिदानी मदन लाल ढींगड़ा का नाम स्वतंत्रता सेनानियों में एक प्रेरक के रूप में लिया जाता हैं। अपनी प्रारंभिक पढ़ाई लाहौर में पूरी करने के बाद ये आगे पढ़ने के लिए लंदन गए वहां लंदन यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में पढ़ने के लिए दाखिला लिया।
वहां इनका संपर्क लंदन के इंडिया हाउस में महान क्रांतिकारी वीर सावरकर व श्याम कृष्ण वर्मा से हुआ। उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने भारत को अंग्रेजों से मुक्त कराने की कसम खाई। एक रिटायर्ड अंग्रेज अधिकारी कर्नल विलियम वायली जो भारतीयों से विशेष घृणा करता था। उसकी घृणा पूर्ण हरकतों की वजह से मदन लाल ढींगड़ा ने उसको स्वयं ही मारने का निर्णय ले लिया।
एक जुलाई 1909 को मदनलाल ढींगड़ा ने एक कार्यक्रम में वायली पर गोलियों की बौछार कर मार दिया। इस हत्याकांड के बाद अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर मात्र 25 वर्ष की आयु में 17 अगस्त 1909 को फांसी पर चढ़ा दिया। इस अवसर पर अशोक आहूजा, डॉ. बलदेव सैनी, मास्टर सत्यदेव आर्य, परविंद्र अरोड़ा, गुरदयाल सैनी, राधा कृष्ण अरोड़ा, गुलशन अरोड़ा बकाना, हरीश मेहंदीरत्ता, कोमल अरोड़ा, सुनील मटिया, ईश्वर झांब मौजूद रहे।