संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। विश्वकर्मा कॉलोनी में स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर के पुजारी अवध बिहारी पांडे ने बताया कि 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है। लोहड़ी का पर्व पूरे देश में काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लोहड़ी के दिन लकड़ियां इकट्ठी करके आग लगाई जाती है और लोग आग की परिक्रमा करके पारंपरिक गीत गाते हैं। लोहड़ी के दिन आग जलाने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है।
उन्होंने बताया कि एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया था लेकिन इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। इस बात से नाराज होकर सती अपने पिता के पास जवाब लेने पहुंची। वहां, पति शिव की निंदा वे बर्दाश्त नहीं कर पाईं और उन्होंने खुद को उसी यज्ञ में भस्म कर दिया।
सती की मृत्यु का समाचार सुन भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया। ऐसा किसी के साथ न हो इसलिए हर साल लोहड़ी पर आग लगाई जाती है ताकि फिर इस आग में कोई लड़की न जले। साथ ही लोहड़ी पर बेटी और दामाद को आमंत्रित किया जाता है।