यमुनानगर। एक मेला जहां तीर्थराज श्री कपालमोचन का लगेगा तो दूसरा जगाधरी में बर्तन मेला लगेगा। जिस तरह से कपालमोचन मेले से पीढ़ी ले जाने की परंपरा है, ठीक उसी तरह जगाधरी से बर्तन ले जाने की भी परंपरा है। कपालमोचन से वापस जाते समय जगाधरी से श्रद्धालु बर्तन खरीद कर ले जाते हैं। इस मेले को लेकर बर्तन कारोबारी तैयार हैं।
जगाधरी की पहचान बर्तनों की वजह से है। यहां पर हर प्रकार के बर्तन बनते हैं। इसलिए भी लोग यहां से बर्तन खरीदते हैं। उनके मन में रहता है कि यहां पर अच्छे बर्तन मिलते हैं। वहीं दूसरी वजह यह बताई जा रही है कि पुराने समय में लोग कपालमोचन में वाहनों में ज्यादा आते हैं। वापसी के समय वे जगाधरी में जरूर रुकते थे। जहां पर बस स्टैंड जगाधरी है, वहां पर एक तीर्थ गंगा सागर सरोवर होता था।
इसमें भी श्रद्धालु स्नान करते थे और कुछ देर जगाधरी में आराम करते थे। इस दौरान यहां से जाते समय वे बर्तन लेकर जाते थे। क्योंकि यहां बाजार में बर्तनों की दुकानें उस समय भी काफी होती थीं। दी जगाधरी मैटल मैन्युफैक्चरर्स एंड सपलायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदर लाल बत्रा ने बताया कि दिवाली के बाद कारोबारियों को कपालमोचन मेले से काफी उम्मीद होती हैं। बर्तन मेले के लिए माल तैयार किया जा रहा है।