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पटाखे बेचने की अनुमति मांगने डीसी के पास पहुंचे व्यापारी

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जगाधरी। दिवाली नजदीक आते ही पटाखा विक्रेताओं की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। पटाखा कारोबारियों को प्रशासन की तरफ अभी तक फुटकर बिक्री के लिए अनुमति नहीं मिली है। बता दें कि प्रदूषण को देखते हुए सरकार व न्यायालय की ओर से इसके लिए विशेष नियम बनाए हैं। ऐसे में पटाखा कारोबारी प्रशासन से बिक्री के लिए अनुमति मांग रहे हैं।
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इसी को लेकर शुक्रवार को उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा का प्रतिनिधिमंडल डीसी से मिला। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जिला सचिव विपिन गुप्ता ने किया। यहां कारोबारियों ने डीसी के सामने अपनी मांगें रखी। उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र मित्तल ने पटाखा व्यापारियों को ग्रीन आतिशबाजी बेचने व शहर वासियों को कुछ घंटे पटाखे छोड़ने की अनुमति देने की मांग की। वहीं बाजार में बिगड़ी यातायात व्यवस्था सुधारने व त्योहारों पर वाहनों के लिए अस्थायी पार्किंग बनाने की मांग की।
डीसी ने पटाखा व्यापारियों के स्टाल लगाने को लेकर चर्चा की। डीसी ने व्यापारियों को नियमानुसार सहयोग करने का आश्वासन दिया। महेंद्र मित्तल ने कहा कि दिवाली देश का प्रमुख त्योहार है। इस दौरान पूरे साल जितनी बिक्री इन दिनों में होती है। दीपावली के व्यापार से देश की जीडीपी दोगुनी हो जाती है। यह कई लोगों के साल भर की आजीविका का साधन है। दिवाली पर आतिशबाजी की खूब बिक्री होती है और इससे सरकार को भी भारी राजस्व मिलता है। परंतु इसके लिए प्रशासन की ओर से रोक लगाई गई है। प्रशासन को ईको फ्रैंडली पटाखे बेचने की अनुमति देनी चाहिए। यहां महिला प्रभारी सुमन वाल्मीकि, जिला प्रभारी संदीप गांधी ने ग्रीन पटाखों संबंधी सरकार से अभियान चलाने की मांग की। इस दौरान कार्यकारी अध्यक्ष संजय मित्तल, संगठन मंत्री सुनील वैद्य, जिला प्रभारी एवं प्रवक्ता संदीप गांधी, जिला सचिव दीपक कपूर, जिला सचिव विपिन गुप्ता, नीरज अरोडा, योगेश लांबा, संदीप गुप्ता, तरुण, मनीष, विकास, जितेंद्र शर्मा, प्रिंस, सोहिल, डिंपल, अशोक सहित अन्य उपस्थित रहे।
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त्योहार पर बनाई जाए अस्थायी पार्किंग
व्यापारियों ने कहा कि बाजारों में वाहनों की भीड़ बढ़ती जा रही है। जिससे ग्राहकों के साथ दुकानदारों को भी परेशानी हो रही है। इसके निदान के लिए बडे मैदानों में अस्थायी पार्किंग बनाई जा सकती है। महेंद्र मित्तल ने कहा कि ओपी जिंदल पार्क स्टेडियम, ग्रे पैलिकन के पास का खाली मैदान, स्कूल कॉलेज के खाली मैदान इत्यादि को अस्थाई पार्किंग बनाकर लोगों को राहत पहुंचाई जाए।
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