चुहड़पुर कलां में स्थित प्रदेश के सबसे बड़े चौधरी देवी लाल हर्बल नेचर पार्क में एक बार फिर से पर्यटकों की चहलकदमी शुरू हो जाएगी। 184 एकड़ में फैले इस सुंदर हर्बल पार्क को एक करोड़ रुपये से पुनर्विकास किया जाएगा।
प्रोजेक्ट पर वन एवं पर्यटन मंत्री की मुहर भी लग चुकी है। अब जल्द ही इसके पुनर्विकास के लिए कार्य शुरू हो जाएगा। ऐसे में पर्यटक फिर से यहां आकर बोटिंग का आनंद उठा सकेंगे। साथ ही यहां लगी औषधीय पौधों के बारे में जानकारी भी ले सकेंगे।
उल्लखेनीय है कभी इस हर्बल पार्क में बोटिंग हुआ करती थी जो अब बंद है। बोटिंग दोबारा शुरू होगी, इसके अलावा यहां बनी बांस की हट, मीटिंग हॉल हट के अलावा पार्क की साफ सफाई के अलावा यहां बने कर्मचारियों के कमरे इत्यादि भी दुरुस्त होंगे। बता दें ज्यादातर पर्यटक यहां झील में बोटिंग का आनंद लेने के लिए आया करते थे। वो बंद हो जाने से पर्यटकों की संख्या भी कम हो गई। इस झील में हर्बल पार्क के किनारे से गुजर रही पश्चिमी यमुना नहर के पानी को पाइप लाइन द्वारा छोड़ा जाता है इसलिए इसमें पानी रहता था। लेकिन देखरेख के अभाव के कारण झील के किनारे भी टूट गए और बोटिंग बंद हो गई।
इस हर्बल नेचर पार्क में जलीय पौधों, फर्न, पर्वतारोहियों, झाड़ियों, जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों और पेड़ों की 300 से अधिक प्रजातियां हैं। इस पार्क की कुछ प्रमुख उपजें हैं, हल्दी या हल्दी, पामारोसा, जेट्रोफा, लिकोरिस, लेमन ग्रास, पत्थरचूर, कलिहारी, बेल, रुद्राक्ष, आंवला या फाइलेंथस एम्ब्लिका, ब्राह्मी, शतावरी, पिप्पली, हरड़, ग्वारपाठा, बहेरा, भूमि आमलकी , मकोय, तुलसी, इसबगोल, चित्रक, वच, सफेद मुसली, अश्वगंधा और सर्पगंधा। इन पौधों का अत्यधिक औषधीय महत्व है और ये आयुर्वेदिक दवाओं का आधार बनते हैं। इसके अलावा, इस हर्बल नेचर पार्क में सिंबल, शीशम, सागौन और खैर जैसे पेड़ भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
बता दें मिसाइल मैन एवं पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम 19 अप्रैल 2003 को यमुनानगर आए थे। उन्होंने चूहड़पुर हर्बल पार्क का उद्घाटन रुद्राक्ष का पौधा लगाकर किया था। इस कार्यक्रम में वे जिस कुर्सी पर बैठे थे उस कुर्सी को सदा के लिए आरक्षित कर दिया गया था। उस समय यह तय किया गया था कि अब इस कुर्सी पर कभी कोई नहीं बैठेगा। आज भी वह कुर्सी यहां मौजूद है, जिस पर पूर्व राष्ट्रपति के नाम की प्लेट भी लगी हुई है। अब ये कुर्सी शहर के लिए किसी धरोहर से कम नहीं है। तब से लेकर आज तक यह कुर्सी आरक्षित है।
हर्बल पार्क को दोबारा से विकसित किया जाएगा। करीब एक करोड़ रुपये से यहां विकास कार्य किया जाना है। दोबारा से बोटिंग शुरू होगी साथ ही यहां बनी हट की मरम्मत के अलावा अन्य कार्य किये जाने हैं। इससे पयर्टकों की संख्या बढ़ेगी।
-कंवरपाल, वन एवं पर्यटन मंत्री।