जठलाना। रादौर क्षेत्र में टमाटर की फसल खत्म होते ही उसके दामों में कई गुणा वृद्धि हो गई है। मंदे में दो रुपये किलो बिकने वाला टमाटर अब 30 से 35 रुपये प्रति किलो मंडियों में बिक रहा है।
टमाटर की फसल से इस बार किसानों को भारी निराशा हुई है। जिसके बाद किसानों ने टमाटर की फसल को उजाड़कर धान की रोपाई करनी शुरू कर दी है। गांव फतेहगढ़ के टमाटर उत्पादक किसान महिपाल गांगुली, रामकुमार, केहरसिंह, खिलाराम, छज्जूराम, रतनलाल ने बताया कि रादौर क्षेत्र के बहुत बड़े रकबे में टमाटर की खेती होती है। इस बार टमाटर के दाम कम मिलने के कारण किसानों को भारी निराशा हुई, लेकिन जब टमाटर की फसल खत्म होने का समय आया तो उसके दाम आसमान छूने लगे हैं।
पहले टमाटर की 25 किलो की कैरेट मात्र 40 से 50 रुपये में बिकती थी। अब दामों में वृद्धि होने के बाद 25 किलो की कैरेट लगभग 800 रुपये में बिक रही है। किसानों ने बताया कि लगभग 95 प्रतिशत किसानों की टमाटर की फसल खत्म हो चुकी है। ऐसे में अब टमाटर के दाम बढ़ने से बहुत कम किसानों को लाभ मिलेगा।
ज्यादातर किसान कम दाम मिलने पर टमाटर की फसल को कई दिनों पहले नष्ट कर चुके हैं। यदि 15 दिन पहले इसी प्रकार टमाटर के दाम बढ़ते तो किसानों को ज्यादा लाभ होता। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में टमाटर की फसल समाप्त होेने के बाद अब बाजार में हिमाचल का टमाटर आया है। जिससे अब टमाटर के दाम बढ़ने पर हिमाचल के किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
इस बारे भारतीय किसान यूनियन मंडल प्रधान बाबूराम ने कहा कि टमाटर के कम दामों के लिए सरकार की गलत नीतियां जिम्मेवार है। सरकार को सब्जियों के दाम निर्धारित करने चाहिए। इससे किसानों को लाभ मिलता है और उनकी सब्जियां सही दाम पर बिक सकती है।