श्री हनुमान मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते कथा व्यास। संवाद
यमुनानगर। रामपुरा कॉलोनी स्थित श्री हनुमान मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास स्वामी चैतन्य मृदुल महाराज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन और संस्कारों का महत्व समझाया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि प्रभु का अवतार केवल अत्याचार के अंत और धर्म की स्थापना के लिए होता है। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव में लीन होकर कथा का श्रवण किया।
कथा व्यास ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार, दुराचार और पापाचार बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं। उन्होंने बताया कि जब मथुरा के राजा कंस के अत्याचार बढ़ गए थे, तब भगवान विष्णु ने देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लेकर अधर्म का अंत किया। इसी प्रकार त्रेता युग में रावण के अत्याचारों से पृथ्वी पीड़ित हुई तो भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना की।
स्वामी चैतन्य मृदुल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं परमात्मा होते हुए भी अपने माता-पिता के चरणों में प्रणाम करने में कभी संकोच नहीं करते थे। इससे हमें संस्कार और विनम्रता की सीख मिलती है। उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाना चाहिए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा कि दूध का सार तत्व माखन होता है। इसी प्रकार प्रभु ने माखन चुराकर यह संदेश दिया कि मनुष्य को भी जीवन के सार तत्व अर्थात परमात्मा को ग्रहण करना चाहिए और संसार के नश्वर भोगों में अपना समय नष्ट नहीं करना चाहिए।
कथा व्यास ने यह भी कहा कि भगवान की लीलाओं की नकल करने के बजाय उनके बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने मांसाहार से दूर रहने और जीवों के प्रति करुणा रखने का संदेश देते हुए कहा कि सभी को सात्विक जीवन अपनाकर आत्मिक उन्नति की ओर बढ़ना चाहिए। कथा के दौरान भजनों के साथ श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर नजर आए। संवाद
श्री हनुमान मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते कथा व्यास। संवाद