संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। रोडवेज डिपो इन दिनों मैकेनिकों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे बसों के रखरखाव और मरम्मत कार्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। हालात यह हैं कि डिपो की वर्कशॉप में फिलहाल केवल तीन मैकेनिकों के भरोसे पूरे बेड़े की मरम्मत का जिम्मा है। ऐसे में खराब होने वाली बसें कई-कई दिनों तक वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं और समय पर सड़कों पर नहीं लौट पा रहीं।
डिपो में वर्ष 2012 के बाद से मैकेनिकों की नई भर्ती नहीं हुई है। पुराने कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद तकनीकी स्टाफ लगातार कम होता गया, लेकिन रिक्त पद नहीं भरे गए। इसका सीधा असर बस संचालन पर पड़ रहा है। कई बसें मामूली तकनीकी खराबी के बावजूद लंबे समय तक खड़ी रहती हैं, जिससे नियमित रूटों पर बसों की संख्या घट गई है।
स्थिति को और गंभीर बना रही है जरूरी स्पेयर पार्ट्स की समय पर उपलब्धता न होना। वर्कशॉप कर्मचारियों का कहना है कि कई बार पार्ट्स की कमी के कारण मरम्मत कार्य अधूरा छोड़ना पड़ता है। इससे बसों को दोबारा चलने में और अधिक समय लग जाता है। बसों की कमी के चलते यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कई रूटों पर बसों का इंतजार लंबा हो गया है, जबकि कुछ स्थानों पर यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने विभाग से जल्द मैकेनिकों की भर्ती करने की मांग की है, ताकि रोडवेज सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकेें।
रोडवेज वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। डिपो में बसों की मरम्मत का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। - संदीप रावल, महाप्रबंधक, यमुनानगर डिपो