शहर के इकलौते आरओबी (चांदपुर) पर भी वाहन चालकों का सफर खतरों से खाली नहीं है। इस पर चांदपुर से विश्वकर्मा चौक तक पौन किलोमीटर के रास्ते जगह-जगह सीमेंट और लोहे की रेलिंग टूटी है। टूटी रेलिंग के बीच तंग और खस्ताहाल जगह के बीच से ही वाहन चालक आरओबी पर उतरने-चढ़ने लगे हैं।
इससे न सिर्फ उनकी बल्कि आरओबी से आते-जाते वाहन चालकों की भी जान का खतरा है। ऐसा नहीं है कि पीडब्ल्यूडी अफसर आरओबी पर बने हालात से अनभिज्ञ हैं, जबकि वह खुद बार-बार रेलिंग टूटने से परेशान हैं। एक्सईएन नवीन खत्री की मानें तो लाखों रुपये खर्च कर कई बार रेलिंग लगाई और रिपेयर कराई, किंतु उसके बाद फिर लोग अपने-आने जाने-आने के लिए शॉर्टकट के चक्कर में रेलिंग तोड़ देते हैं। इससे हादसे की आशंका के साथ विभाग को भी नुकसान हो रहा है। ऐसे में यातायात विभाग की ओर से टूटी रेलिंग के बीच बने अवैध रास्तों से निकलते वाहन चालकों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
चांदपुर मोड़ के छोर पर जहां आरओबी उतरता है, वहां रोड क्रॉस करते कई लोग आरओबी से आते-जाते वाहनों की चपेट में आ चुके हैं। इसमें कई की मौत और कई घायल हुए। इसके बाद भी हालात वैसे ही हैं। हालांकि यहां दोनों ओर लोहे की रेलिंग लगाई गई, पर वह भी जगह-जगह तोड़कर बीच से आने-जाने के रास्ते बना दिए गए। जहां से आरओबी पर वाहनों की आवाजाही के बीच से लोग रोज जान जोखिम में डाल रोड क्रॉस करते आम देखे जा सकते हैं। ऐसे ही आरओबी पर सीमेंट की रेलिंग भी टूटी हैं, जहां से दोनों ओर बसी कॉलोनियों से लोग आरओबी पर चढ़ते-उतरते या क्रॉसिंग करते हैं। जहां-जहां ऐसे रेलिंग तोड़ अवैध रास्तों से वाहन चालक आ-जा रहे हैं, वहां जाम की स्थिति के साथ हादसे की भी आशंका बनी हुई है।
आरओबी के बीच जहां नीचे से रेलवे ट्रैक निकल रहे हैं, वहां भी सीमेंट की रेलिंग टूटी या गायब है। जबकि नीचे रेलवे ट्रैक से हर दिन सैकड़ों ट्रेनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में रेलवे ट्रैक के ऊपर रेलिंग न होना बड़े हादसे की वजह बन सकता है।
गत दो फॉग सीजन में भी यहां सफेद पट्टी नहीं बनाई गई जबकि धुंध व रात के समय सफेद पट्टी से रोड की स्थिति स्पष्ट होती है। आरओबी पर स्ट्रीट लाइट भी नहीं हैं, जिससे शाम बाद यहां अंधेरा रहता है। ऐसा तब है, जब यहां से 24 घंटे वाहनों की आवाजाही है।
पूरे आरओबी के दोनों ओर बरम गायब है। सड़क व बरम लेवल में कई ईंच अंतर है, जिससे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को है। जो सड़क से लगते कच्चे रास्ते से चाहकर भी नहीं निकल पाते या उनके कच्चे रास्ते व सड़क पर उतरते-चढ़ते हादसे की आशंका रहती है।
वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए आरओबी पर ट्रैफिक लाइट, कैटआई, ब्लिंकर, पूर्व सूचक बार्ड भी नहीं हैं। जिससे वाहन चालक अपने अंदाजे से ही यहां से आते-जाते हैं।
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन नवीन खत्री ने कहा कि आरओबी पर पहले तारकोल की एक लेयर बिछाई जानी है। जिसके बाद यहां रोड सेफ्टी के मद्देनजर जरूरी ट्रैफिक संसाधन लगाएंगे। आरओबी की रेलिंग टूटने व उसके बीच से रोड क्रॉसिंग का मामला भी संज्ञान में है। दरअसल, विभाग बार-बार रेलिंग लगाने व रिपेयर करवा रहा है, पर लोग उसे तोड़ फिर से अपने-आने जाने के रास्ते बना लेते हैं। इसलिए ऐसे अवैध रास्तों से निकलने वाले वाहन चालकों पर यातायात विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए। पीडब्ल्यूडी जल्द रेलिंग की मरम्मत कराएगा।