संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। कृषि एवं ग्रामीण मजदूर संगठनों के देशव्यापी आह्वान के तहत मंगलवार को ब्लॉक व्यासपुर में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में मजदूरों, किसानों और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने इसमें भाग लिया। प्रदर्शन के उपरांत राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया, जिसमें केंद्र सरकार की नीतियों को गरीब, मजदूर और ग्रामीण जनता के हितों के खिलाफ बताया गया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ रही है और जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में मनरेगा को पूर्ण रूप से बहाल करने तथा विकसित भारत रोजगार गारंटी आजीविका मिशन ग्रामीण योजना को रद्द करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही मनरेगा के तहत 200 दिन का रोजगार और 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।
मुख्य वक्ता अजय वीर संधू ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूरों और किसानों को हाशिये पर धकेल रही हैं। वहीं, मुख्य वक्ता अरुण शक्करवाल ने कहा कि श्रमिक-विरोधी चारों श्रम संहिताएं मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला हैं, जिन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और पुराने श्रम कानूनों को बहाल किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने बिजली बिल 2025, सीड बिल, विस्थापन एवं जबरन भूमि अधिग्रहण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही अरावली पहाड़ियों को बचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनविरोधी फैसले वापस नहीं लिए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।